दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता और अपराधी के बीच किसी भी तरह के समझौते को देश की सबसे बड़ी अदालत ने अस्वीकार्य करार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस कवायद को पीड़ित महिला की गरिमा के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा है कि इस तरह के मामलों में दोनों की शादी करा देने या किसी भी अन्य तरह के समझौते का प्रयास पूरी तरह से अनुचित और अवैध माना जाएगा. शीर्ष अदालत ने इस तरह के मामलों में अदालतों के नरम रवैये पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें सख्त कार्रवाई करने की नसीहत पिलाई है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में हुए दुष्कर्म के एक मामले में सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.
शीर्ष अदालत की इस टिप्पणी को महिला अधिकारों की दृष्टि से बेहद सराहनीय माना जा रहा है.
दरअसल मध्यप्रदेश की एक निचली अदालत ने मदनलाल नाम के एक व्यक्ति को एक सात वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उसे पांच साल कैद की सजा सुनाई थी. लेकिन भोपाल हाइकोर्ट ने इसे छेड़छाड़ का मामला मानते हुए उसे रिहा कर दिया. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जिस पर अदालत की यह टिप्पणी आई है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मदनलाल को तुरंत गिरफ्तार करने तथा भोपाल उच्‍च न्‍यायालय से इस मामले को फिर से सुनने को भी कहा है. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को महिला अधिकारों की दृष्टि से बेहद सराहनीय माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि इसके बाद दुष्कर्म के मामलों में होने वाले समझौतों पर काफी हद तक अंकुश लग सकेगा. भारत में इस तरह के मामलों को समझौते के जरिए निपटा देने के ढेरों उदाहरण हैं. कुछ समय पहले ही मद्रास हाईकोर्ट ने दुष्कर्म  के एक आरोपी को इस आधार पर जमानत दे दी थी कि ताकि वह पीड़िता के साथ समझौता कर सके. इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई थी.
'ललित गेट' का बवंडर फिर से सुषमा स्वराज तक पहुंचा
भ्रष्टाचार के आरोपी ललित मोदी की मदद को लेकर कई दिनों से चल रहा राजनीतिक बवंडर एक बार फिर से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक पहुंच गया है. कहा जा रहा है कि ललित मोदी ने सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल के सामने अपनी कंपनी इंडोफिल से जुड़ने की पेशकश की थी. इसके तहत स्वराज कौशल को ललित मोदी की जगह पर बोर्ड का सदस्य बनाया जाना था. हालांकि स्वराज कौशल ने इससे इनकार कर दिया. बताया जा रहा है कि इस ऑफर के जरिए ललित मोदी सुषमा स्वराज द्वारा की गई उनकी मदद का कर्ज चुकाना चाहते थे. इस खुलासे के बाद से कांग्रेस पार्टी एक बार फिर सुषमा स्वराज के खिलाफ हमलावर हो गई है. पार्टी नेताओं का कहना है कि, यह पेशकश इतना बताने के लिए काफी है कि ललित मोदी और विदेश मंत्री के परिवार के बीच किस स्तर तक नजदीकिंयां हैं.
उधर, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने सुषमा का बचाव करते हुए दलील दी है कि उनके पति द्वारा नौकरी की पेशकश अस्वीकार कर दी गई थी, लिहाजा इस मामले को तूल देने की जरूरत नहीं है. इसके बावजूद कांग्रेस इस मुद्दे को हाथ से नहीं जाने देना चाहती. माना जा रहा है कि इसके जरिए वह ललित मोदी के उस ट्वीट को भी फीका करना चाह रही है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का जिक्र किया है. दरअसल बीती रात ललित मोदी ने एक ट्वीट करके कहा था कि कुछ साल पहले भाजपा सांसद वरुण गांधी ने उनसे मुलाकात करके उन्हें यह भरोसा दिलाया था कि वे सोनिया गांधी के जरिए उनके खिलाफ चल रहे सभी मामलों का निपटारा करवा देंगे. ललित मोदी के इस ट्वीट के बाद कांग्रेस भी भाजपा की तरह ही सकते में आई हुई है.
नेहरू से जुड़ी गलत जानकारियों पर भड़की कांग्रेस ने पीएम से सफाई मांगी
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जीवन से जुड़ी जानकारियों से छेड़छाड़ किए जाने से नाराज कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री से सफाई मांगी है. पार्टी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके इशारे पर ही विकीपीडिया पर मौजूद नेहरू से जुड़ी जानकरियों को बदला गया. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक फ्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पंडित नेहरू और उनके पिता मोती लाल नेहरू से जुड़े विकीपीडिया के पन्नों पर डाली गई गलत जानकारियां केंद्र सरकार के नियंत्रण वाले एक आईपी एड्रेस से अपलोड की गईं थी. उन्होंने कहा कि सरकार ने गलत इरादों से यह दिखाने की कोशिश की कि नेहरू जी के पूर्वज मुस्लिम थे. सुरजेवाला ने केंद्र सरकार से इस मामले की जांच करने की मांग भी की है.
विकीपीडिया पर किए जाने वाले अज्ञात बदलावों को ट्रैक करने वाले सॉफ्टवेयर के अनुसार नेहरू तथा उनके परिवार से जुड़े पेजों पर बदलाव कथित रूप से 26 जून को ट्रेस किए गए. इनके मुताबिक , 'गंगाधर का जन्म गयासुद्दीन गाजी के रूप में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अंग्रेजों से बचने के लिए अपना नाम बदल कर गंगाधर रख लिया था.' इसके अलावा इस पेज में नेहरू और भारत में अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन के बीच संबंधों को लेकर भी कुछ बातें डाली गई थीं. इन बदलावों को विकीपीडिया के ऑनलाइन एडिटरों ने डिलीट कर दिया. इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है. पार्टी का कहना है कि इस हरकत के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए. पार्टी ने मोदी से सवाल पूछा है कि क्या वे इस मामले का संज्ञान लेकर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे. बहरहाल केंद्र सरकार की तरफ से इसको लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.