देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. गायक और संगीतकार भूपेन हज़ारिका के पुत्र तेज हज़ारिका ने अपने पिता की ओर से भारत रत्न लेने से इनकार कर दिया है. उन्होंने इसके पीछे केंद्र सरकार के नागरिकता (संशोधन) विधेयक का हवाला दिया है. इसे पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से भारत आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए नागरिकता आसान बनाने के लिए लाया गया है.

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब किसी को भारत रत्न दिए जाने के बाद विवाद हुआ हो. आइए जानते हैं कि इससे पहले कब-कब इस सम्मान को लेकर सवाल उठे.

कुमारस्वामी कामराज

स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद कुमारस्वामी कामराज कांग्रेस पार्टी को संभालने के लिए याद किए जाते हैं. जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री और उनके बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में उन्होंने किंग मेकर की भूमिका निभाई. वहीं, इस पद के लिए दो बार प्रबल दावेदार रहे मोरारजी देसाई को उन्होंने प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया. कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा के कामराज तीन बार मद्रास (अब तमिलनाडु) के मुख्यमंत्री रहे. कहा जाता है कि वे पहली बार अनिच्छा के साथ इस राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. लेकिन इस पद पर रहते हुए उन्होंने तमिलनाडु के लिए बेहतरीन काम किया, खास तौर पर शिक्षा के क्षेत्र में.

दो अक्टूबर, 1975 को के कामराज का निधन हो गया था. इसके एक साल बाद 1976 में इंदिरा गांधी की सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया था. माना जाता है कि 1977 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में राज्य के मतदाताओं को लुभाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री की सरकार ने अपने वफ़ादार नेता को इस पुरस्कार से नवाज़ा था.

एमजी रामचंद्रन

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार और बाद में मुख्यमंत्री बने एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) को भारत रत्न देना भी राजनीतिक रूप से विवादित रहा. एमजीआर का 1987 में निधन हो गया था. उन्हें 1988 में मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया. इसके ठीक एक साल बाद तमिलनाडु में चुनाव होने थे. इसलिए तत्कालीन केंद्र की राजीव गांधी सरकार पर आरोप लगा कि उसने राज्य के मतदाताओं को ख़ुश करने के लिए इस तमिल सुपरस्टार को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया था.

डॉ भीमराव अंबेडकर

भारत रत्न के लिए संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की योग्यता पर शायद ही कोई सवाल उठाए. लेकिन उन्हें यह सम्मान उनके जीवित रहते नहीं दिया गया. और जब दिया गया तो राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. 1990 में वीपी सिंह की सरकार ने अंबेडकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा था. उस समय कहा गया था कि सरकार ने अंबेडकर की जन्म शताब्दी वर्ष को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह सम्मान देने का फ़ैसला किया है. लेकिन इसकी यह कह कर आलोचना की जाती है कि चूंकि दलित मतदाता अंबेडकर को जीवित रहते यह सम्मान नहीं दिए जाने से नाराज़ थे, इसलिए उन्हें संतुष्ट करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री ने उनके मसीहा को भारत रत्न दिया.

सुभाष चंद्र बोस

भारत रत्न से जुड़े विवादों में सबसे बड़ा विवाद संभवतः स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा है. उन्हें जनवरी, 1992 में यह सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई थी. लेकिन आज तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिल पाया है. दरअसल, नेताजी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. इसमें याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए बोस को ‘मरणोपरांत’ भारत रत्न दिए जाने पर आपत्ति जताई थी कि सरकार ने औपचारिक तौर पर यह स्वीकार नहीं किया कि 18 अगस्त, 1945 को एक विमान दुर्घटना में बोस की मृत्यु हो गई थी. इसके तुरंत बाद नेताजी के परिवार ने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया था.

सचिन तेंदुलकर

महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर को भारत में ‘क्रिकेट के भगवान’ का दर्जा मिला हुआ है. वे यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं. सचिन को 2013 में भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की गई थी. इसके लिए इस पुरस्कार से संबंधित नियमों तक में बदलाव कर दिया गया था क्योंकि पहले खेल के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान देने वालों को यह सम्मान नहीं मिलता था.

सचिन तेंदुलकर को यह सम्मान दिए जाने पर एक बड़ी आपत्ति यह जताई जाती रही है कि उनसे पहले यह सम्मान अन्य खेलों के महान खिलाड़ियों को मिलना चाहिए था. इनमें हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यान चंद और महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के नाम शामिल हैं. सचिन को भारत रत्न दिए जाने को चुनाव से भी जोड़ा गया. उन्हें यह सम्मान मिलने की घोषणा के बाद चुनाव आयोग में एक याचिका दायर की गई थी. इसमें कहा गया था कि सचिन (उस समय) कांग्रेस के राज्यसभा सांसद थे, इसलिए उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना एक चुनावी हथकंडा है.