भारत और फ्रांस के बीच हुए रफाल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट संसद में पेश की गई. यह रिपोर्ट बुधवार को राज्य सभा के पटल पर रखी गई. इसके मुताबिक पूर्ववर्ती यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार के समय जिस कीमत पर रफाल विमानों का सौदा हुआ था उससे 2.8 प्रतिशत कम मूल्य पर मौज़ूदा एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार ये विमान ख़रीद रही है.

एनडीटीवी के मुताबिक रिपोर्ट कहती है कि रफाल विमानों की आधारभूत कीमत तो लगभग वही है जो यूपीए सरकार के समय तय हुई थी. लेकिन भारत की ज़रूरतों के हिसाब से तकनीकी और सामरिक परिवर्तनों के बाद यह विमान नए सौदे के तहत तुलनात्मक रूप से सस्ते पड़ रहे हैं. इससे देश का 17.08 फ़ीसदी (पूरी ख़रीद में) पैसा बचा है. ग़ौरतलब है कि यूपीए सरकार के समय 126 रफाल विमानों का सौदा हुआ था. लेकिन एनडीए सरकार ने संशोधित सौदा 36 विमानों का किया. लेकिन इसके साथ यह भी जोड़ा गया कि सभी विमान फ्रांस से ही भारतीय ज़रूरतों के हिसाब से पूरी तरह तैयार होकर आएंगे. भारत ने इन विमानों में 13 तरह के विशिष्ट परिवर्तन कराए हैं.

वैसे ख़बरों की मानें तो यह रिपोर्ट भी पूरी तरह विवादमुक्त नहीं है क्योंकि इसमें मूल्य निर्धारण से जुड़े कुछ विवादित बिंदुओं को शामिल ही नहीं किया गया है. इसकी वज़ह ये बताई गई है कि रक्षा मंत्रालय ने गाेपनीयता का हवाला देते हुए विवादित बिंदुओं के बारे में कैग को कोई जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया था. दूसरी बात ये भी कि मौजूदा कैग राजीव महर्षि 2016 में केंद्रीय वित्त सचिव हुआ करते थे. यानी उस समय जब रफाल विमानाें के संशोधित सौदे पर दस्तख़त हुए. इन्हीं आधारों पर विपक्ष ने रिपोर्ट को ख़ारिज़ कर दिया है. वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट किया है, ‘कैग रिपोर्ट से महाझूठबंधन के झूठ का भांडाफोड़ हो गया है.’ यानी अब आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर.