गूगल ने आज भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक मधुबाला को उनके 86वें जन्मदिन पर डूडल बना कर श्रद्धांजलि दी है. महज 36 साल की उम्र में दुनिया छोड़ देने वाली मधुबाला ने अपनी अदाकारी से हर किसी को प्रभावित किया. वहीं, उनकी ख़ूबसूरती का जलवा ऐसा था कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो सिर्फ उन्हें देखने के लिए शूटिंग सेट पर पहुंच जाते थे. यह इत्तेफाक है कि मधुबाला का जन्म ‘प्यार का दिन’ कहे जाने वाले वेलेंटाइन डे के दिन हुआ था.

14 फरवरी, 1933 को दिल्ली में जन्मीं मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां देहलवी था. उनके पिता अताउल्लाह पहले पेशावर की एक तंबाकू फैक्ट्री में काम करते थे. बाद में वे नौकरी छोड़ कर पहले दिल्ली और फिर मुंबई चले गए. वहां मात्र नौ साल की उम्र में मधुबाला का परिचय फिल्म इंडस्ट्री से हुआ. 1942 में रिलीज हुई फिल्म ‘बसंत’ उनकी पहली फिल्म थी. इसके बाद उन्होंने ‘धन्ना भगत’ (1945), ‘फुलवारी’ (1946) और ‘राजपुतानी’ (1946) में काम किया. लेकिन मुख्य भूमिका वाली पहली फिल्म उन्हें ‘नीलकमल’ के रूप में मिली. 1947 की इस फिल्म में उन्होंने राज कपूर के साथ काम किया था. बाद में ‘महल’ (1949), ‘दुलारी’ (1949), ‘बेकसूर’ (1950), ‘तराना’ (1951) और ‘बादल’ (1951) भी हिट रहीं.

वहीं, जिस फिल्म ने उन्हें शोहरत की बुलंदी पर पहुंचाया, वह थी 1960 में रिलीज हुई मुगल-ए-आजम. भारतीय सिनेमा की सबसे बड़े प्रॉजेक्ट वाली इस फिल्म में उनके साथ दिलीप कुमार और पृथ्वीराज कपूर जैसे दिग्गज नजर आए. इसके बावजूद इस ऐतिहासिक फिल्म को मधुबाला की भूमिका के लिए भी उतना ही याद किया जाता है जितना बाकी दोनों कलाकारी की भूमिका के लिए.

कहा जाता है कि मधुबाला, दिलीप कुमार से प्रेम करती थीं. लेकिन उनके पिता उनकी शादी के लिए राजी न हुए. इसके चलते दोनों अलग हो गए. बाद में मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी कर ली. इसके बाद दिल की बीमारी के चलते जल्दी ही उन्होंने सिनेमा जगत का साथ छोड़ दिया. कहा जाता है कि मधुबाला को 1950 से अपनी बीमारी के बारे में पता था, फिर भी वे लगातार काम करती रहीं. लेकिन बीमारी से कहीं ज्यादा तकलीफदेह किशोर कुमार का उन्हें अकेला छोड़ देना रहा. हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार अभिनेत्रियों में से एक मधुबाला ने अपने जिंदगी के आखिरी दिन अकेले गुजारे. 23 फरवरी, 1969 को उनका निधन हो गया.

लेकिन मधुबाला का नाम आज भी जिंदा है. फिल्म जगत के लोग उन्हें हमेशा याद करते रहे और जानकार उनकी अदाकारी और खूबसूरती के बारे में लिखते रहे. साल 2008 में भारत सरकार ने उनके नाम का टिकट जारी किया. वहीं, अगस्त 2017 में मशहूर मैडम तुसाद म्यूजियम के लिए उनकी मूर्ति का अनावरण किया गया.