आर्थिक रूप से भगोड़े करार दिए जा चुके कारोबारी विजय माल्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘प्रखर वक्ता’ बताया है. साथ ही उन्होंने सवाल भी किया है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय बैंकों से क्यों नहीं कहते कि वे मेरी पेशकश स्वीकार कर लें.’

मौज़ूदा लोक सभा के आख़िरी दिन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद विजय माल्या ने सिलसिलेवार ट्वीट किए. इनमें प्रधानमंत्री मोदी के उसी भाषण का उन्होंने संदर्भ दिया. साथ ही अपनी पेशकश दोहराई. ग़ौरतलब है कि दिवालिया हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख और शराब कारोबारी विजय माल्या पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय बैंकों से 9,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा का कर्ज़ लिया. फिर इसे चुकाए बिना लंदन चले गए. भारतीय एजेंसियां इसी मामले में उन्हें वापस भारत लाने के लिए अब लंदन में प्रत्यर्पण का केस लड़ रही हैं.

इस पूरी कार्रवाई से परेशान विजय माल्या ने भारतीय बैंकों का 100 फ़ीसदी मूलधन वापस करने की पेशकश की है. लेकिन इसे अब तक स्वीकार नहीं किया गया है. बल्कि कोशिश ये की जा रही है कि उन्हें भारत लाकर उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाए. इसी मामले का प्रधानमंत्री ने लोक सभा में अपने भाषण के दौरान ज़िक्र किया था. उन्होंने अपने भाषण में कोई नाम लिए बगैर ‘9,000 करोड़ रुपए लेकर भाग गए काराेबारी’ का संदर्भ दिया, जिसका इशारा विजय माल्या की तरफ था. इसी बात को माल्या ने भी पकड़ा और ज़वाबी ट्वीट किए.

माल्या के तीन सिलसिलेवार ट्वीट

The Prime Ministers last speech in Parliament was brought to my attention. He certainly is a very eloquent speaker. I noticed that he referred to an unnamed person who “ran away” with 9000 crores. Given the media narrative I can only infer that reference is to me.

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I have made the offer to settle before the Hon’Ble High Court Court of Karnataka. This cannot be dismissed as frivolous. It is a perfectly tangible, sincere, honest and readily achievable offer. The shoe is on the other foot now. Why don’t the Banks take the money lent to KFA ?

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I respectfully ask why the Prime Minister is not instructing his Banks to take the money I have put on the table so he can at least claim credit for full recovery of public funds lent to Kingfisher.