पाकिस्तान भले ही पुलवामा आतंकी हमले को लेकर भारत के आरोपों को खारिज कर रहा है, लेकिन अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस हमले के पीछे उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने का संदेह जताया है. पीटीआई के मुताबिक दक्षिण एशिया से जुड़े मामलों के अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस आतंकी हमले में जैश-ए-मोहम्मद की संलिप्तता ने इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खडे़ कर दिए हैं.

खबर के मुताबिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आतंकवादी हमले से पता चलता है कि अमेरिका जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान को मनाने में विफल रहा है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एक पूर्व विश्लेषक ब्रूस रिडेल ने समाचार एजेंसी को बताया, ‘हमले में जैश-ए-मोहम्मद की स्व-घोषित भागीदारी इस हमले के सरगना के समर्थन में आईएसआई की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है.’ रिडेल ने कहा कि इस हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ते हैं, इसलिए वहां के प्रधानमंत्री इमराख खान के कार्यकाल की यह पहली बड़ी चुनौती है.

वहीं, ओबामा प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक पूर्व अधिकारी अनीश गोयल ने कहा कि इस भयावह हमले से पता चलता है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह किस तरह अब भी कश्मीर में सक्रिय हैं. उन्होंने कहा, ‘हमले के तुरंत बाद इसकी जिम्मेदारी लेने का दावा करके जैश-ए-मोहम्मद स्पष्ट रूप से संकेत दे रहा है कि वह इस क्षेत्र में परेशानी पैदा करता रहेगा और पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बढ़ाता रहेगा.’ गोयल के मुताबिक इस हमले के मद्देनजर प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) पर कश्मीर में सक्रिय सभी आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ने की संभावना है.