‘हम भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं.’  

— जॉन बोल्टन, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

जॉन बोल्टन ने यह बात पुलवामा आतंकवादी हमले के मद्देनजर अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल से कही है. टेलीफोन पर हुई इस बातचीत में दोनों अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत पाकिस्तान को उसके कर्तव्यों को लेकर जिम्मेदार ठहराने का संकल्प लिया. साथ ही, जैश-ए-मोहम्मद के नेता मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में शामिल करने के रास्ते में खड़ी सभी बाधाओं को हटाने की बात भी दोहराई गई. जैश ने ही पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली है.

‘दिवालिया होने के कगार पर खड़ा देश अब आतंक का दूसरा नाम बन गया है.’  

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात महाराष्ट्र के यवतमाल में एक रैली के दौरान पाकिस्तान को निशाना बनााते हुए कही. उन्होंने यह भी कहा कि पुलवामा में जो हुआ उसके बाद पूरा देश उबल रहा है. नरेंद्र मोदी के मुताबिक वे शहीदों के परिवारों का दर्द समझते हैं और सैनिकों की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी. उनका यह भी कहना था कि हमले के साजिशकर्ताओं को सजा मिले, इसके लिए पूरी आजादी दी गई है.


‘देश की संसद को सही मायने में प्रतिनिधिवादी बनने की आवश्यकता है.’

— प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति

पूर्व राष्ट्रपति का यह बयान संसद में सीटें बढ़ाने की वकालत करते हुए आया है. प्रणब मुखर्जी के मुताबिक देश के सर्वाधिक लोकतांत्रिक संस्थान को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला बनाने के लिए जनसंख्या के अनुपात में सीटें बढ़ाने की जरूरत है. वर्तमान में लोकसभा में 545 सीटें हैं. इनमें से 543 निर्वाचित सीटें हैं जबकि दो सीटें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए हैं.


‘तुर्की ने खशोगी की हत्या से जुड़ी सभी जानकारियों का खुलासा नहीं किया है.’  

— रजब तैय्यब एर्दोआन, तुर्की के राष्ट्रपति

तुर्की के राष्ट्रपति ने यह बात एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार के दौरान कही है. वरिष्ठ पत्रकार और सऊदी अरब सरकार के आलोचक जमाल खशोगी की दो अक्टूबर, 2018 को इस्तांबुल में स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी. वे अपनी शादी से संबंधित जरूरी कागजी कार्रवाई पूरा करने के लिये दूतावास आए थे. सऊदी अरब ने कई हफ्ते तक नकारने के बाद यह बात स्वीकार की थी कि खशोगी की हत्या उसके वाणिज्य दूतावास में ही की गई है.


 ‘एक साथ शांति से रहना ही इज़राइल-फिलिस्तीन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने का एकमात्र तरीका है.’  

— एंटोनियो गुटेरेस, संयुक्त राष्ट्र महासचिव

एंटोनियो गुटेरेस ने यह बात सं युक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1975 में गठित फिलिस्तीन के निवासियों की ‘एक्सरसाइज ऑफ द एलियन एबल राइट्स’ समिति को संबोधित करते हुए कही. उनका कहना था, ‘संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों, लंबे समय से कायम सिद्धांतों, पूर्व समझौतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर यरूशलम को दोनों देशों की राजधानी होना चाहिए.’ 1948 से लेकर अब तक इस शहर को लेकर फिलिस्तीन और इजराइल के बीच विवाद चल रहा है. दोनों इसे अपना बताते हैं.