बिहार के मुज़फ्फरपुर स्थित आश्रय स्थल में रहने वाली लड़कियों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में अब राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ जांच होगी. यह ज़िम्मेदारी सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपी गई है.

ख़बरों के मुताबिक पटना की विशेष पॉक्सो (बच्चो को यौन अपराध से सुरक्षा देने वाला कानून) अदालत ने यह आदेश जारी किया है. सीबीआई को नीतीश कुमार के अलावा राज्य के दो वरिष्ठ अफसराें की भूमिका की जांच भी सौंपी गई है. अदालत ने यह आदेश मामले के एक आरोपित अश्वनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. अश्वनी स्वघोषित मेडिकल प्रेक्टिशनर है. उस पर आरोप है कि वह आश्रयस्थल में रहने वाली लड़कियाें के यौन उत्पीड़न से पहले उन्हें दर्द दूर करने इंजेक्शन लगाता था.

अश्वनी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि सीबीआई ने इस मामले की पहले की गई जांच के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके दो नज़दीकी अफ़सरों की भूमिका को जानबूझकर नज़रंदाज़ किया. उससे जुड़े तथ्यों को दबाया. इन अफ़सरों में मुज़फ्फरपुर के पूर्व जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) धर्मेंद्र सिंह और वरिष्ठ आईएएस अतुल कुमार सिंह शामिल हैं. अतुल पहले मुज़फ्फरपुर के संभागीय आयुक्त होते थे. वर्तमान में वे राज्य के समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव हैं.