जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल) के काफ़िले पर हुए आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी- आईएसआई (इंटर सर्विसेज़ इंटेलीजेंस) के प्रमुख आसिम मुनीर की सक्रिय मदद हो सकती है. सूत्रों के हवाले से द इकॉनॉमिक टाइम्स ने यह ख़बर दी है.

अख़बार के मुताबिक आईएसआई के काम करने के तौर-तरीकों से जो लोग परिचित हैं उनका दावा है कि 42 भारतीय जवानों की जान लेने वाले इस आतंकी हमले के पीछे आसिम मुनीर की मदद ही नहीं, दिमाग भी हो सकता है. आईएसआई की कमान संभालने से पहले आसिम मुनीर पाकिस्तानी सेना की उत्तरी कमान के कमांडर थे. यानी सेना की वह इकाई जो जम्मू-कश्मीर से लगते इलाकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उठाती है. इस नाते वे कश्मीर की वादियों से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं.

इसके अलावा आसिम मुनीर आईएसआई प्रमुख के तौर पर अभी नए हैं. उन्हें सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के सामने ख़ुद को साबित करने का एक मौका चाहिए था. क्योंकि बाजवा ने ही उन्हें आईएसआई प्रमुख चुना था. तिस पर जिस तरह सीआरपीएफ के क़ाफ़िले पर हमला हुआ वह भी बताता है कि योजनाबद्ध तरीके से और पूरे प्रशिक्षण के बाद इसे अंज़ाम दिया गया. बताया यह भी जाता है कि इस हमले को पहले फरवरी के पहले सप्ताह में अंज़ाम दिया जाना था. उस समय भारतीय संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफ़ज़ल गुरु को फांसी दिए जाने की बरसी थी. लेकिन तब तैयारी पुख़्ता न होने की वज़ह से इसे टाल दिया गया था.

पाकिस्तान पर दो किताबें लिख चुके और कैबिनेट सचिवालय से संबद्ध तिलक देवसर अख़बार से बातचीत में इन तमाम अनुमानों की पुष्टि करते हैं. उनके मुताबिक, ‘आसिम मुनीर ने इस हमले के ज़रिए अपने सेना प्रमुख के सामने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है. कश्मीर से उनके परिचय ने इस हमले की कामयाबी में उनकी मदद की है.’