दक्षिण भारत के सुपरस्टार रजनीकांत ने जब से राजनीति में आने की घोषणा की है तब से उन्हें लेकर तरह-तरह की अटकलबाजियों का दौर चल रहा है. तमिलनाडु की राजनीति में वे किस पाले जाएंगे या फिर अकेले ही अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएंगे, इसको लेकर तरह-तरह की बातें चलती रही हैं. हालांकि राजनीतिक गलियारों में बहुत सारे लोगों को यह लग रहा है कि देर-सबेर रजनीकांत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक साथ आ जाएंगे.

भाजपा से रजनीकांत की नजदीकी बढ़ने की संभावनाओं के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. पहली बात तो यह कही जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रजनीकांत के अच्छे संबंध हैं. कुछ सार्वजनिक मौकों पर नरेंद्र मोदी ने रजनीकांत की तारीफ की है और रजनीकांत ने भी पहले कुछ मौकों पर मोदी की तारीफ की है.

इस बीच रजनीकांत को अपने साथ औपचारिक गठबंधन में लाने की कोशिशें भी भाजपा की ओर से हुई हैं. इस सुपरस्टार ने 31 दिसंबर 2017 को सक्रिय राजनीति में आने की सार्वजनिक घोषणा की थी और भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी तभी से उनके संपर्क में हैं.

भाजपा के ये वरिष्ठ नेता अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताते हैं, ‘मेरी उनसे जितनी भी बार बात हुई, हर बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आदर दिखाया और उनके कामों को सराहा. लेकिन भाजपा के साथ औपचारिक गठबंधन में आने के प्रस्ताव पर उन्होंने कभी भी कोई वादा नहीं किया. हमने उन्हें यह प्रस्ताव भी दिया था कि अगर वे औपचारिक तौर पर गठबंधन में नहीं आना चाहते या अभी तुरंत चुनावी राजनीति में नहीं आना चाहते तो हमारे पक्ष में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रचार ही कर दें. हम चाहते थे कि वे और भाजपा मिलकर काम करें.’

रजनीकांत भले ही औपचारिक तौर पर भाजपा गठबंधन में शामिल नहीं हुए हों लेकिन भाजपा के ही कुछ नेता अनाधिकारिक बातचीत में कह रहे हैं कि रणनीतिक तौर पर रजनीकांत भाजपा के साथ हैं. परोक्ष रूप से रजनीकांत द्वारा भाजपा का साथ दिए जाने की बात अगर कही जा रही है तो इसके पीछे भी ठोस वजहें हैं.

पिछले दिनों रजनीकांत ने यह घोषणा की है कि वे अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और किसी पार्टी को समर्थन भी नहीं देंगे. रजनीकांत ने यह भी कहा है कि उनके नाम का या उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में कोई न करे. इसके अलावा उन्होंने अपने समर्थकों से कहा है कि उनका लक्ष्य इसी साल होने वाला लोकसभा चुनाव नहीं है बल्कि 2021 में होने वाला विधानसभा चुनाव है. साथ ही इस अभिनेता ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे अभी से विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट जाएं.

इन्हीं बातों के साथ रजनीकांत ने एक ऐसी बात कही जिससे राजनीतिक जानकारों को यह लग रहा है कि उन्होंने भाजपा के साथ भले ही औपचारिक गठबंधन न किया हो लेकिन वे परोक्ष रूप से भाजपा का ही साथ दे रहे हैं. रजनीकांत ने अपने समर्थकों से यह कहा है कि वे लोकसभा चुनाव में उसी पार्टी को वोट दें जो केंद्र में स्थायी सरकार देने में सक्षम हो.

यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी अपनी सभाओं में कह रहे हैं. ये दोनों और भाजपा के दूसरे नेता केंद्र में स्थायी सरकार की बात कहकर ही अपने लिए दूसरा कार्यकाल लोगों से मांग रहे हैं. विपक्ष के अभियानों और एकजुटता की कोशिशों को भाजपा केंद्र में स्थायी सरकार देने की अपनी क्षमता की बात कहकर ही खारिज करने की कोशिश कर रही है.

केंद्र में स्थायी सरकार देने में सक्षम पार्टी को वोट देने की रजनीकांत की अपील ऐसे समय पर आई है जब इसी हफ्ते भाजपा ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके और राज्य की दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन की घोषणा की है. पहले यह चर्चा थी कि अगर गठबंधन में सिर्फ भाजपा और एआईएडीएमके ही रहते हैं तो तमिलनाडु और पुड्डुचेरी को मिलाकर कुल 40 लोकसभा सीटों में 25 एआईएडीएमके को जाएंगी और 15 भाजपा को. लेकिन अब इस गठबंधन में कई दूसरी पार्टियां भी शामिल हो गई हैं. इस वजह से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को जिस गठबंधन की घोषणा की, उसमें भाजपा को पांच सीटें मिली हैं. एआईएडीएमके कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह अभी तय नहीं हुआ है. क्योंकि अब भी इस गठबंधन में कुछ और पार्टियों को लाने की कोशिश हो रही है.

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और एम करुणानिधि की पार्टी डीएमके का गठबंधन भी हो गया है. इसके तहत कांग्रेस तमिलनाडु और पुड्डुचेरी की कुल दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं डीएमके और बाकी सहयोगी पार्टियों के बीच सीटों पर अंतिम बंटवारा नहीं हुआ है.

तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन भी हो जाने का मतलब ये हुआ कि राज्य में लगभग तय हो गया है अगला लोकसभा चुनाव सीधे तौर पर दो खेमों के बीच होगा. अगर रजनीकांत भी इसमें उतरने की घोषणा कर देते तो तमिलनाडु का संघर्ष त्रिकोणीय हो जाता. रजनीकांत को दक्षिणपंथी राजनीतिक रुझान रखने वाला व्यक्ति माना जाता है और इसीलिए यह भी माना जा रहा था कि अगर वे लोकसभा चुनाव में उतरते तो ऐसे मतदाताओं को अपनी ओर खींचते. वहीं भाजपा का कोई मजबूत आधार इस राज्य में नहीं है और इसके साथ जो समर्थक नरेंद्र मोदी के नाम पर जुड़े हैं, उनके रजनीकांत के पाले में सबसे अधिक जाने की संभावना है. इस वजह से भी कहा जा रहा है कि रजनीकांत कम से कम लोकसभा चुनावों में परोक्ष रूप से ही सही भाजपा का समर्थन कर रहे हैं.