पुलवामा हमले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में प्रचार के लिए शूटिंग में व्यस्त रहने से जुड़ी खबर आज सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में है. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस हवाले से गुरुवार को कहा है कि पूरे देश के चूल्हे जब शोक में बुझे थे तब प्रधानमंत्री (जिम कॉर्बेट में) चाय का आनंद ले रहे थे. सोशल मीडिया पर इस खबर को कई लोगों ने शेयर किया है और प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाया है. इस मामले में मोदी पर तंज करते हुए दिलीप खान की फेसबुक पोस्ट है, ‘कांग्रेस पूछ रही है कि जब पुलवामा अटैक हुआ तो मोदी जी जिम कॉर्बेट में फोटो शूट करा रहे थे…अमित शाह को इसका सीधा जवाब देना चाहिए कि मोदी जी क्या कैमरे को निराश करते?’

एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक भाजपा ने इस मामले में प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा है कि ‘खराब मौसम और कमजोर नेटवर्क (फोन का)’ के कारण उन्हें हमले की सूचना मिलने में 25 मिनट की देर हुई थी. वहीं कुछ न्यूज चैनलों पर यह खबर भी चली है कि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जवाब तलब किया गया था. फेसबुक और ट्विटर पर इस जिक्र से साथ भी सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं. पत्रकार रोहिणी सिंह का ट्वीट है, ‘प्रधानमंत्री कार्यालय से यह खबर कौन चलवा रहा है कि यह डोभाल की गलती थी?’
सोशल मीडिया में इन खबरों पर आईं कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
हमारे पीएम सर को खबर तो मिल गई थी कि आतंकवादी हमला हुआ है, लेकिन उन्हें लगा कि ये रोज का वो 2-4 जवान मरने वाला हमला होगा. प्राइम टाइम टाइप चीज नहीं है, इसलिए वे आराम से घड़ियालों को निहारते रहे और घड़ियाल उन्हें.
पुलवामा हमले के तीन घंटे बाद भी नरेंद्र मोदी डिस्कवरी चैनल की शूटिंग में व्यस्त थे. कहा ये जा रहा है कि खराब मौसम के चलते उनसे संपर्क नहीं हो पाया. लेकिन कारण यहां नेहरू होने चाहिए जो मोबाइल टावर पर बैठ गए थे और उन्होंने सिग्नल डिस्टर्ब कर दिए थे.
हमसे यह यकीन करने की अपेक्षा की जा रही है कि डिजिटल इंडिया के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रधानमंत्री से संपर्क नहीं कर सके. और जो लोग यहां शूटिंग कर रहे थे, उनमें से किसी के स्मार्टफोन तक यह खबर भी नहीं पहुंच पाई.
उमाशंकर सिंह | @umashankarsingh
ये बात बहुत गंभीर है. अपने ही देश में पीएम को भीषण आतंकी हमले की जानकारी कई घंटे तक नहीं मिलती है क्योंकि ‘मौसम खराब’ था! क्या पीएम उसी तरह के स्लो स्पीड वाले 4G का इस्तेमाल करते हैं जो देश की आम जनता करती है? क्या होता अगर दुश्मन ने देश पर और बड़ा हमला बोल दिया होता?
पुलवामा हमले के बाद अगर जिम कार्बेट में प्रधानमंत्री से संपर्क नहीं हो पाया तो क्या इसे भी खतरनाक चूक नहीं मानना चाहिए?
फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर हमसे जुड़ें | सत्याग्रह एप डाउनलोड करें
Respond to this article with a post
Share your perspective on this article with a post on ScrollStack, and send it to your followers.