एक अध्ययन आधारित पुस्तक में कहा गया है कि भारतीय अखबारों में भारी भरकम अंग्रेजी शब्दों और लंबे-घुमावदार वाक्यों के चलते पाठकों के लिए खबर को समझना मुश्किल हो गया है. वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया से जुड़े शिक्षाविद किरण ठाकुर ने अपनी किताब ‘न्यूजपेपर इंग्लिश’ में इस बात पर रोशनी डाली है. इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे ज्यादातर अखबार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सादी और आसान न होकर बेहद कठिन है.

ठाकुर ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘मैंने पाया है कि भारतीय पत्रकार लंबे और घुमावदार वाक्यों, गैरजरूरी शब्दों और बेहद लफ्फाजी वाली भाषा का इस्तेमाल करते हैं. वे ऐसी खबर लिखते हैं जिसे समझना आम पाठक के लिए मुश्किल होता है.’ किताब के मुताबिक पत्रकार अक्सर ऐसे भारी-भरकम और तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जिनका इस्तेमाल आम पाठक नहीं करते. इसकी वजह से उनका पाठकों के साथ संवाद बाधित होता है.

किताब में कहा गया है, ‘पाठक आमतौर पर व्यस्त लोग होते हैं. वे हर खबर न तो पढ़ सकते हैं और न ही पढ़ना चाहेंगे. वे अपनी पसंद के आधार पर खबर का चुनाव करते हैं.’ किताब आगे कहती है, ‘इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी पाठक ने दूसरा पैराग्राफ पहले पढ़ा हो. पाठक दूसरा पैराग्राफ तभी पढ़ते हैं जब उन्हें पहला पैराग्राफ समझ आ जाता है. अगर आप यह बात नहीं जानते, तो आपका पाठक किसी दूसरी जगह खबर पढ़ना पसंद करेगा.’