इस साल होने वाले आम चुनाव में ट्विटर, फेसबुक और वाट्सएप की भी अहम भूमिका दिख रही है. अलग-अलग पार्टियों के नेता मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाने और प्रतिद्वंदी पार्टी के नेताओं पर निशाना साधने के लिए इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. हाल तक सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती भी बीते महीने ट्विटर पर आ गईं. उनकी इस आमद के एक हफ्ते के भीतर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सक्रिय राजनीति के साथ-साथ ट्विटर पर भी कदम रखे. हालांकि, इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने को लेकर दोनों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है.

बीती छह फरवरी को ट्विटर पर आने के बाद मायावती अब तक करीब 100 पोस्ट कर चुकी हैं. इनके जरिए वे कई मुद्दों पर भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ा करती हुई दिखी हैं. वहीं, प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रिय राजनीति की हलचलों से उनका ट्विटर अकाउंट काफी हद तक अछूता दिखाई दे रहा है. ट्विटर पर आए उन्हें महीने भर से ज्यादा का वक्त हो चला है. इस दौरान उनके महज तीन ट्वीट आए हैं और ये भी पिछले दो दिनों में आए. साथ ही, उनके खाते में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या फिर पार्टी का कोई रीट्वीट भी नहीं दिखता.

सवाल उठता है कि जब राजनेताओं की गतिविधियों में ट्विटर की अहम भूमिका हो चली है तो प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आने के बाद भी इसके इस्तेमाल को लेकर इतनी मितव्ययी क्यों हैं. इस का एक जवाब 10 फरवरी यानी प्रियंका गांधी के ट्विटर पर आने से पहले उनके नाम से जारी कई ट्वीटों से जोड़कर देखा जा सकता है. उदाहरण के लिए बीती तीन फरवरी को किए गए एक ट्टीट का जिक्र किया जा सकता है. इसे प्रियंका के नाम के एक फर्जी अकाउंट-@PriyankagaINC से ट्टीट किया गया था. इसमें लिखा गया था, ‘भारत मूर्खों का देश है जहां सरकार लोगो के पीने के पानी पर नही बल्कि ढोंगी और शाही स्नान पर पे करोडो का खर्च करती है.’ इसके बाद करीब हफ्ते तक इस ट्वीट को सोशल मीडिया पर कई अकाउंटों के जरिए वायरल किया गया गया था. इनमें से एक फेसबुक अकाउंट Modi Government भी है. इसके 3.26 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं. फिलहाल ट्विटर @PriyankagaINC हैंडल को बंद बता रहा है.

कुछ जानकारों के मुताबिक प्रियंका के ट्विटर पर आने की एक वजह इस तरह के अकाउंट भी रहे होंगे. उन्हें लगा होगा कि उनके नाम से फर्जी जानकारी वायरल न की जा सके, इसके लिए कम से कम इस माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर ‘ब्लू टिक’ वाला अकाउंट होना चाहिए.

दूसरी ओर, प्रियंका के उलट मायावती ट्विटर पर काफी सक्रिय दिख रही हैं. इसके जरिए वे न केवल पार्टी से संबंधित जानकारी साझा कर रही हैं बल्कि, कई मुद्दों पर पर केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करती हुई दिख रही हैं. मसलन 13 मार्च को उन्होंने ट्वीट किया, ‘यूपी बीजेपी सरकार ने लोकलाज त्याग कर लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले निगम/आयोग में अध्यक्ष आदि पद पर मनोयन कर थोक भाव में रेवड़ियाँ बांटी। एैश करो अच्छे दिन हैं। एमपी में कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। लेकिन याद रहे कि पब्लिक सब समझती है। चुनाव में पूरा हिसाब चुकता करेगी।’

वहीं, बीती आठ फरवरी को जब खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट ने उनसे राज्य में हाथियों की मूर्तियों पर हुए खर्च को वापस करने के लिए कहा है तो मायावती ने अपनी पहली प्रतिक्रिया ट्विटर के जरिए ही दी थी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘मीडिया कृप्या करके माननीय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश ना करे। माननीय न्यायालय में अपना पक्ष ज़रूर पूरी मजबूती के साथ आगे भी रखा जायेगा। हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में भी मा. न्यायालय से पूरा इंसाफ मिलेगा। मीडिया व बीजेपी के लोग कटी पतंग ना बनें तो बेहतर है।’

यानी ट्विटर के जरिये बसपा मुखिया न केवल मीडिया को सलाह देती हुई दिखती हैं बल्कि, वे मीडिया के लिए किसी खबर का प्राथमिक स्रोत भी बनती हुई दिख रही हैं. मायावती ने ट्विटर अपने हैंडल पर भी इस बात का जिक्र किया है कि इसका इस्तेमाल न्यूज फ्लैश और खबरों आदि के लिए किया जा सकता है. यहां यह भी याद करना जरूरी है कि मीडिया के साथ मायावती के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं. साल 2014 के चुनाव में मायावती ने मीडिया पर आरोप लगाया था कि उसने बसपा से जुड़ी खबरों को न के बराबर जगह दी.

उधर, कुछ जानकारों के मुताबिक प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस की बात करने या फिर भाजपा और मोदी सरकार को घेरने के लिए ट्विटर पर लगातार सक्रियता की जरूरत नहीं है. राहुल गांधी के साथ पार्टी के प्रवक्ताओं की एक पूरी टीम इस काम में लगी हुई है. शायद यही वजह है कि जो कुल जमा तीन ट्वीट उन्होंने किए भी हैं उनका विषय साबरमती आश्रम और महात्मा गांधी का संदेश है.