बंबई उच्च न्यायालय ने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर और उसके प्रबंधन को अदालत को गुमराह करने के लिए फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कंपनी की याचिका ‘छल कपट वाली’ लगती है.

रिलायंस पावर द्वारा वित्तीय सेवा कंपनी एडलवाइस ग्रुप के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश केआर श्रीराम ने कंपनी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की. रिलायंस समूह ने याचिका में यह मांग की थी कि एडलवाइस ईसीएल फाइनेंस द्वारा उसके गिरवी रखे शेयरों की बिक्री गैरकानूनी है. साथ ही रिलायंस ने उसे हुए वित्तीय नुकसान तथा उसकी छवि को पहुंचे आघात के लिए 2,700 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का दावा भी किया था.

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि रिलायंस पावर की पूरी याचिका ‘छलकपट वाली लगती है और यह उसकी ओर से अदालत को भ्रमित करने का प्रयास है. अदालत ने कहा कि एडलवाइस ने जो किया उसमें कुछ गलत नहीं है. अदालत ने एडलवाइस को अपना जवाब सुनवाई की अगली तारीख 22 मार्च तक देने को कहा है. इससे पहले 13 फरवरी को न्यायाधीश ने कंपनी को एडलवाइस के खिलाफ किसी तरह की राहत देने या बिक्री प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया उनकी याचिका का कोई आधार नहीं है.