ऑस्कर्स के मायने हिंदुस्तानियों के लिए अलग होते हैं. अमेरिकी दर्शक नामित फिल्मों में से ज्यादातर के बारे में पहले से जानता है. हॉलीवुड और विश्व-सिनेमा से जुड़ा प्रचार-तंत्र साल के शुरुआत से ही उन्हें ऐसी फिल्मों से मुखातिब करता चलता है. कई फिल्में उन्होंने देख भी ली होती हैं और ‘ऑस्कर बज़’ के चलते पुरस्कारों की घोषणा से पहले थियेटरों में पुन: लगी फिल्मों को देखने का उन्हें दूसरा मौका भी नसीब होता है. इसलिए ऑस्कर्स ज्यादातर अमेरिकियों के लिए यह जानने की उत्सुकता लेकर आते हैं कि उनकी पसंदीदा फिल्में जीतेंगी या नहीं. या जो जीती हैं, वे उनके हिसाब से सही चुनाव हैं कि नहीं.

ज्यादातर हिंदुस्तानियों के लिए ऑस्कर पुरस्कारों का अर्थ जीती हुई फिल्मों को ढूंढ़-ढूंढ़कर देखना होता है. जो फिल्में प्रमुख ऑस्कर पुरस्कार जीतती हैं, उन्हें लेकर हमारे यहां ये चलन काफी समय से देखा गया है कि इन पुरस्कृत फिल्मों को देखने के लिए हिंदुस्तानी दर्शक अति का उत्साह दिखाते हैं. फिर कई फिल्में ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा के बाद ही हिंदुस्तान में रिलीज भी होती हैं (जैसे इस बार ‘द फेवरेट’), इसलिए ऑस्कर एक बहाना बन जाता है दुनिया भर की कुछ उत्कृष्ट फिल्मों को सिनेमाघर, ऑनलाइन मंचों या फिर टॉरन्ट्स के माध्यम से देखने का.

तो पेश-ए-खिदमत है, ऑस्कर्स के लिए नामित ऐसी पांच फिल्में जो इस बार आप 25 फरवरी की अलसुबह ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा के बाद (6.30 बजे से हॉटस्टार पर) ढूंढ़-ढूंढ़कर देखेंगे. ये फिल्में कई पुरस्कार भी जीतने वाली हैं और साथ ही लाखों-करोड़ों दिलों को भी मोहने वाली हैं.

रोमा

श्वेत-श्याम खूबसूरती में रंगी ‘रोमा’ इस साल का ‘सर्वश्रेष्ठ फिल्म’ का ऑस्कर जीतने की प्रबल दावेदार है. इतनी, कि मानकर चलिए कि अगर आखिरी समय में कुछ खास उठापटक नहीं हुई तो मैक्सिकन फिल्मकार अलफोंसो कुआरॉन की यही फिल्म सबसे ज्यादा महत्व रखने वाला ऑस्कर पुरस्कार जीतेगी.

स्पेनिश और मैक्सिकन भाषा में बनी ‘रोमा’ को ऑस्कर्स में कुल 10 नामांकन हासिल हुए हैं. सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अलावा सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषी फिल्म के लिए भी यह नामित है और साथ ही सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ मौलिक पटकथा, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (यालित्जा अपारिसियो Yalitza Aparicio) और सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री (मरीना देतावीरा Marina de Tavira) जैसे अहम पुरस्कारों के लिए भी. ऑस्कर्स के इतिहास में आज तक केवल अंग्रेजी भाषी फिल्में ही बेस्ट फिल्म का ऑस्कर अवॉर्ड जीत पाई हैं. अगर ‘रोमा’ यह ऑस्कर जीतती है तो ऐसा करने वाली पहली गैर-अंग्रेजी भाषी फिल्म भी बन जाएगी.

‘रोमा’ के बेस्ट फिल्म का ऑस्कर जीतने की संभावना एक और वजह से सर्वाधिक है. यह उस मैक्सिको और उन गरीब मैक्सिकन लोगों की मर्मस्पर्शी कहानी अथाह संवेदना के साथ दिखाती है जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति के चलते इन दिनों अमेरिका में नफरत का सामना करना पड़ रहा है. जो जहर अमेरिका की मौजूदा राजनीति मैक्सिको के नागरिकों के खिलाफ उगल रही है, उसका प्रतिकार करने के लिए भी हो सकता है कि एकेडमी ‘रोमा’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार से नवाजने में कोई कोर-कसर न छोड़े.

‘ग्रैविटी’ (2013) के निर्देशक और ‘बर्डमैन’ (2014) के सिनेमेटोग्राफर अलफोंसो कुआरॉन ने ‘रोमा’ में 1970-71 के उथल-पुथल वाले मैक्सिको की टेक लेकर मध्यमवर्गीय घर में काम करने वाली ‘बाई’ की कहानी कही है. टाइटल मैक्सिको सिटी में पड़ने वाले रोमा नाम के जिले से लिया गया है, जहां के स्पैनिश भाषी संभ्रांत परिवार के साथ रहने वाली क्लिओ (जीवन में पहली बार अभिनय करने वालीं यालित्जा अपारिसियो) कुत्ते की टट्टी उठाने से लेकर छोटे बच्चों को रात में सुलाने तक के सारे घरेलू काम करती है.

यह फिल्म काफी कुछ निर्देशक के बिताए बचपन पर आधारित है इसलिए प्यार की तरावट वर्गभेद वाली कहानी में भी अमीर-गरीब के करीब आने की दास्तां को खूबसूरती से उकेरती है. एक निजी कहानी को बेहद निजी, इंटिमेट अंदाज में कहा जाता है और आप उस प्यार को महसूस कर पाते हैं जो निर्देशक के मन में अपनी आया के लिए मौजूद रहा होगा. अलफोंसो कुआरॉन का कैमरा अद्भुत संसार रचने में हमेशा से सिद्धहस्त रहा है, और इस बार श्वेत-श्याम रंगों की टेक लेकर वो ‘रोमा’ में जैसे हमें एक ध्यान में डूबे सिनेमा की यात्रा पर ले जाता है.

लंबे-लंबे सिंगल टेक शॉट्स लेने के लिए मशहूर कुआरॉन की ‘रोमा’ में हर फ्रेम कई बातें एक साथ करता है. एक लड़की कीचड़ और गंदे पानी में कदम संभाल-संभालकर चल रही है और आपकी निगाहें उसके पीछे चल रही हैं. तभी निगाहें देखती हैं कि लड़की के पीछे एक लड़का तोप जैसी किसी चीज में से निकला है और नेट पर गिरकर करतब दिखाने लगता है. लड़की नजरों से छूट जाती है और आप उस तोप और लड़के को देखने लगते हैं. लेकिन चूंकि लड़की फिल्म की नायिका है इसलिए आप जल्दी-जल्दी फ्रेम में उसे वापस ढूंढ़ते हैं और इस काम में थोड़ा वक्त लग जाता है! ये एक मामूली-सा उदाहरण भर है, क्योंकि जब आप ‘रोमा’ देखेंगे तो समझेंगे कि दुनियाभर के सिनेप्रेमी क्यों एक सरल-सहज कहानी की यूं मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रहे हैं. कुछ फिल्में सिनेमा नहीं, जीवन-यात्रा होती हैं.

‘रोमा’ को आप नेटफ्लिक्स पर अभी के अभी देख सकते हैं.

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कोल्ड वॉर

2018 में रिलीज फिल्मों को दिए जाने वाले ऑस्कर्स-2019 में दो बेहतरीन फिल्में श्वेत-श्याम रंगों से सजी हुई हैं. एक ‘रोमा’ दूसरी ‘कोल्ड वॉर’. दोनों ही सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषी फिल्म के लिए नामित हैं. अगर ‘रोमा’ प्रबल संभावनाओं अनुसार बेस्ट फिल्म का ऑस्कर जीतती है और एकेडमी को लगता है कि फिर बेस्ट फॉरन लैंग्वेज फिल्म का पुरस्कार किसी दूसरी फिल्म को मिलना चाहिए, तो तय मानिए कि वह फिल्म पोलैंड से आई ‘कोल्ड वॉर’ होगी - दिखने के मामले में ‘रोमा’ के बाद इस बार की दूसरी सबसे खूबसूरत फिल्म.

‘कोल्ड वॉर’ कई दिनों के लिए आपका दिल तोड़ देगी और इसकी देर तक सुलगती उदासी से बाहर आने के लिए आपको कोई खुशनुमा फिल्म देखनी होगी. एक संगीतज्ञ और युवा गायिका की बार-बार मिलकर हर बार बिछड़ने की यह प्रेम कहानी - जैसा कि नाम से जाहिर है - शीत युद्ध के दमित माहौल में मुकम्मल न हो सकी एक खलिश पैदा करने वाली लव स्टोरी है. यह कुछ हद तक निर्देशक पावेल पावलिकोवस्की के माता-पिता की कहानी है और निर्देशक ने इसे नाटकीयता देने के लिए जरूरी सिनेमाई स्वतंत्रताएं ली हैं.

2014 में पावलिकोवस्की की पिछली श्वेत-श्याम फिल्म ‘ईडा’ को बेस्ट फॉरन लैंग्वेज फिल्म का ऑस्कर मिला था और ‘कोल्ड वॉर’ की तरह ही वह अद्भुत फिल्म भी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वाले कम्युनिस्ट पोलैंड के दमनकारी लैंडस्केप पर आधारित थी.

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‘कोल्ड वॉर’ देखते हुए आपको ‘ईडा’ की अलहदा सिनेमेटोग्राफी की खूब याद आएगी. ऐसे समय में जब एकेडमी चाहती थी कि तकनीकी पुरस्कारों का सीधा प्रसारण न हो, यह फिल्म (और ‘रोमा’) देखकर आपको समझ आएगा कि सिनेमा से जुड़ी कुछ तकनीकी चीजें सरल-सहज दिखाई देने के बावजूद कितनी जादुई होती हैं.

गैर-अंग्रेजी भाषी ‘रोमा’ के निर्देशक अलफोंसो कुआरॉन की तरह ही पोलिशव फ्रेंच भाषी ‘कोल्ड वॉर’ के निर्देशक पावलिकोवस्की को भी सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए नामित किया गया है. दोनों में से किसी एक के यह पुरस्कार जीतने की संभावनाएं प्रबल हैं. साथ ही ‘कोल्ड वॉर’ के खूबसूरत कैमरावर्क को भी ‘रोमा’ की तरह ही सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी का नामांकन मिला है.

इनके अलावा एक और तथ्य ‘रोमा’ और ‘कोल्ड वॉर’ के बीच की समानता को दिलचस्प बनाता है. इनका अपनी-अपनी कहानी के वक्त के राजनीतिक हालातों को एक किरदार की तरह प्रस्तुत करना. जहां ‘रोमा’ मैक्सिकन डर्टी वॉर को अपनी कहानी का अहम हिस्सा बनाने से नहीं चूकती, वहीं ‘कोल्ड वॉर’ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्तालिन के दमन से ग्रस्त पोलैंड और उसमें रह रही जिंदगियों का मर्मस्पर्शी चित्रण करती है.

‘कोल्ड वॉर’ को आप जल्द ही एमेजॉन प्राइम वीडियो पर देख सकेंगे. इसका निर्माण एमेजॉन स्टूडियोज ने किया है.

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अ स्टार इज बॉर्न

कलात्मकता का शीर्ष छूने वाली आर्ट फिल्मों से अब सीधे कमर्शियल सिनेमा पर आते हैं. प्रशंसनीय म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा ‘अ स्टार इज बॉर्न’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (ब्रैडली कूपर), सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (लेडी गागा), सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता (सैम एलियट), सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत (शैलो) और सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी मिलाकर आठ नामांकन हासिल हुए हैं. लेकिन, हमारी अपनी ‘आशिकी 2’ (2013) ने इस उम्दा कमर्शियल फिल्म को भारतीयों के लिए खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी!

‘अ स्टार इज बॉर्न’ 1937 की इसी नाम की अमेरिकी फिल्म का आधिकारिक रीमेक है. इसी फिल्म पर इसी नाम की दो और भी हॉलीवुड फिल्में 1954 और 1976 में बन चुकी हैं. भट्ट बंधुओं ने इन्हीं ‘अ स्टार इज बॉर्न’ की नकल करके ‘आशिकी 2’ बनाई और जब 2018 में ब्रैडली कूपर और लेडी गागा की ‘अ स्टार इज बॉर्न’ रिलीज हुई तो ‘आशिकी 2’ देखे बैठे कई हिंदुस्तानियों के लिए इस बढ़िया फिल्म का मजा आधा रह गया! फिल्म में जो-जितना पटकथा में आगे घटित होना था, हम अभागे भारतीयों को वह सब निर्देशक मोहित सूरी साहब पहले ही मेलोड्रामा के छौंक के साथ दिखा चुके थे.

फिर भी ब्रैडली कूपर का सधा निर्देशन, नैराश्य को ओढ़ने वाला उनका उम्दा अभिनय, बिना मेकअप वाली लेडी गागा की मनमोहक उपस्थिति और सुंदर तरीके से फिल्माए गए कई भावपूर्ण गीतों के दम पर ‘अ स्टार इज बॉर्न’ बेहद असरदार फिल्म साबित हुई.

एक दूसरी नामित म्यूजिकल फिल्म ‘बोहिमियन रैप्सडी’ में ब्रायन सिंगर का साधारण निर्देशन देखकर आप आसानी से समझ सकते हैं कि मजबूत निर्देशन (ब्रैडली कूपर) के चलते कैसे कोई म्यूजिकल फिल्म उम्दा बनती है. हालांकि इस फिल्म में क्वीन रॉक बैंड के लीड सिंगर फ्रैडी मरक्यूरी के रोल में अद्भुत कायापलट करने और एकदम लाजवाब अभिनय करने वाले रामी मालेक के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर जीतने की सबसे प्रबल संभावनाएं हैं. लेकिन अमेरिका में खासी सफल होने के बावजूद ‘बोहिमियन रैप्सडी’ बतौर एक म्यूजिकल फिल्म ब्रैडली कूपर निर्देशित ‘अ स्टार इज बॉर्न’ से कतई बेहतर फिल्म नहीं है.

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वैसे इस बार के ऑस्कर्स में मशहूर और कई दिल अजीज ‘अ स्टार इज बॉर्न’ का सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री जैसे मुख्य पुरस्कार जीतना मुश्किल लग रहा है. लेडी गागा ने अभिनय बेहद उम्दा किया है लेकिन ‘द वाइफ’ के लिए वरिष्ठ अभिनेत्री ग्लेन क्लोज के जीतने की संभावनाएं ज्यादा हैं. फिर ‘द फेवरेट’ में शानदार अभिनय करने वालीं ओलिविया कोलमैन भी प्रबल दावेदार हैं. ब्रैडली कूपर भी उम्दा अभिनय करने के बावजूद रामी मालेक और क्रिश्चियन बेल (‘वाइस’) को टक्कर देते नहीं दिखते हैं. फिर ‘कोल्ड वॉर’ और ‘रोमा’ जैसी फिल्मों के चलते इसके सर्वश्रेष्ठ फिल्म का ऑस्कर जीतने की भी संभावना न के बराबर है.

लेकिन, यह फिल्म लेडी गागा और ब्रैडली कूपर के गाए ‘शैलो’ गीत के लिए यकीनन सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत का पुरस्कार जीतेगी. यह एक अद्भुत गीत है जिसका फिल्म में उपयोग भी खासा उम्दा है!

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ब्लैक पैंथर

अश्वेत सुपरहीरो का झंडा बुलंद करने वाली क्रांतिकारी फिल्म ‘ब्लैक पैंथर’ पर इतना कुछ लिखा जा चुका है कि अब कुछ खास नया जोड़ने को बचा नहीं. 2018 के शुरुआत में ही रिलीज होकर इस फिल्म ने तहलका मचा दिया था और अब तक ज्यादातर हिंदुस्तानी दर्शक इसकी उत्कृष्टता से वाकिफ हो ही चुके होंगे. इसे ऑस्कर्स 2019 में सात नामांकन हासिल हुए हैं और सर्वश्रेष्ठ फिल्म की ऑस्कर दौड़ में भी ये प्रमुखता से शामिल है. आज तक कोई ‘सुपरहीरो’ फिल्म बेस्ट फिल्म के लिए नामित तक नहीं हुई है – क्रिस्टोफर नोलन की सुपरहीरो फिल्में भी नहीं - और अगर बड़ा उलटफेर कर ‘ब्लैक पैंथर’ यह प्रमुख ऑस्कर जीत जाती है तो कई तरह से इतिहास रच देगी.

एक तो मार्वल की कमर्शियल फिल्म होने के बावजूद ‘रोमा’ और ‘कोल्ड वॉर’ जैसी अद्भुत फिल्मों को पछाड़ देगी. ‘द फेवरेट’, ‘अ स्टार इज बॉर्न’ जैसी पॉपुलर फिल्में उससे पीछे हो जाएंगी. और फिर सिनेमा इतिहास की वह पहली सुपरहीरो फिल्म बन जाएगी जिसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म का ऑस्कर मिला. वह भी गोरी चमड़ी वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आज वाले श्वेत-मुग्ध अमेरिका में अश्वेत निर्देशक द्वारा रची गई एक सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण अश्वेत सुपरहीरो फिल्म!

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ब्लैक क्लैंसमैन

‘ब्लैक क्लैंसमैन’ (BlacKkKlansman) इस ऑस्कर्स की सबसे मारक पॉलिटिकल फिल्म है! अश्वेत निर्देशक स्पाइक ली की छह ऑस्कर नामांकन हासिल करने वाली यह फिल्म (उनके शब्दों में ‘जॉइंट’!) सत्तर के दशक के एक अश्वेत अमेरिकी पुलिस अफसर रॉन स्टॉलवर्थ की सच्ची कहानी पर आधारित है. उस वक्त के अमेरिकी समाज में हाशिए पर खड़े अश्वेतों के बीच से आने वाला यह पुलिस अफसर श्वेत श्रेष्ठता की सनक का प्रतीक बन चुके ‘कू क्लक्स क्लैन’ (केकेके) की सेंधमारी करता है और धीरे-धीरे उनकी स्थानीय शाखा को नायाब तरीकों से एक्सपोज करता है.

अश्वेत होने के चलते इस फिल्म का हीरो खुद तो कट्टरपंथी श्वेत अमेरिकियों के बीच नहीं जा सकता, इसलिए एक वरिष्ठ श्वेत व यहूदी पुलिस अफसर को अपना श्वेत वर्जन बनाकर कू क्लक्स क्लैन के लोगों के बीच भेजता है! खुद फोन पर इस संगठन के लोगों के साथ दुनिया-भर की हर नस्ल से नफरत करने वाले श्वेत क्रिश्चियन अमेरिकी की तरह बात करता है और केकेके के मुख्य कर्ता-धर्ता तक को ठग लेता है! इस कॉमिक प्रीमाइस के चलते ‘ब्लैक क्लैंसमैन ’ब्लैक कॉमेडी का नकाब ओढ़ती है और उसके पीछे से आज की डोनाल्ड ट्रंप समर्थित श्वेत श्रेष्ठता (व्हाइट सुप्रीमेसी) की कड़ी आलोचना करती है.

यही इस बेहद मनोरंजक फिल्म की सबसे खास बात भी है कि इसकी राजनीति कंटेम्पररी होने के साथ-साथ सत्तर के गुजरे दशक की नस्लवादी घटनाओं की टेक लेकर मौजूदा तंग अमेरिकी हालातों पर बेहद मारक विवेचना प्रस्तुत करती है. फिल्म देखते वक्त आपको लगेगा कि टेरंटिनो मिजाज का कोई सर के बल पलटा सिनेमा देख रहे हैं क्योंकि इसमें अश्वेतों के प्रति तमाम तरह की अपमानजनक बातें खुलकर कही जाती हैं, हास्य की टेक लेकर भी लगातार कही जाती हैं, और अश्वेत निर्देशक इन बातों के सहारे दशकों से चले आ रहे पूर्वाग्रहों का निर्मम चित्रण करता है.

देखना दिलचस्प होगा कि सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता (एडम ड्राइवर), सर्वश्रेष्ठ पार्श्व संगीत, सर्वश्रेष्ठ संपादन जैसे छह ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामित ‘ब्लैक क्लैंसमैन’ राजनीतिक रूप से सचेत एकेडमी के सदस्यों को 25 फरवरी की अलसुबह कितना प्रभावित करने में कामयाब होती है.

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