बिहार के मोकामा में स्थित एक सरकारी बालिका गृह से सात लड़कियां लापता हो गई हैं. आईएएनएस के मुताबिक मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले की गवाह पांच लड़कियां भी इनमें शामिल हैं. इन पांचों को कुछ महीने पहले ही इस बालिका गृह में स्थानांतरित किया गया था.

जिला मजिस्ट्रेट कुमार रवि ने बताया है कि इस मामले में शनिवार को सुबह मोकामा पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है और इसके साथ ही इन लड़कियों की खोजबीन का अभियान शुरू हो गया है. वहीं मोकामा की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गरिमा मलिक ने जानकारी दी है कि पुलिस लड़कियों की तलाश में बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर छापामारी कर रही है. मलिक के मुताबिक, ‘हम हर पहलू से इस मामले की जांच कर रहे हैं और पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये लड़कियां अपने आप भागी हैं या फिर इन्हें इस बालिका गृह से जबर्दस्ती ले जाया गया है.’

हालांकि पीटीआई ने स्थानीय पुलिस के हवाले से अपनी खबर में लिखा है कि ये लड़कियां खिड़की की ग्रिल काटकर बालिका गृह से बाहर निकली हैं. इसके बाद इन्होंने दुपट्टे की मदद से दस फीट ऊंची बाउंड्री वॉल को पार किया और परिसर से भाग गईं. इससे पहले फरवरी में ही सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले को दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. दिल्ली के साकेत में स्थित पॉस्को अदालत सोमवार से इस मामले की सुनवाई शुरू करेगी.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन शोषण का यह मामला बीते साल मई में सामने आया था. तब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) के ऑडिट के दौरान यहां की बच्चियों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई थी. इस रिपोर्ट से पता चला था कि यहां रहने वाली करीब 40 में से आधी से ज्यादा बच्चियों का यौन शोषण किया गया था. यह बालिका गृह एक गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) चलाता था. यह घटना सामने आने के बाद इस एनजीओ के सर्वेसर्वा और इस मामले के मुख्य आरोपित बृजेश ठाकुर को गिरफ्तार किया गया था. शुरू में यह मामला बिहार पुलिस ही देख रही थी लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया.