अरुणाचल प्रदेश सुलग रहा है. वजह है स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र (पीआरसी). हिंसक भीड़ ने रविवार को उपमुख्यमंत्री चौना मेन के निजी आवास में आग लगा दी. खबरों के मुताबिक अब तक प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में छह लोग मारे गए हैं. राजधानी और ईटानगर और एक अन्य प्रमुख कस्बे नाहरलगुन में कर्फ्यू है. दोनों जगहों पर इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई हैं. यहां पर सेना ने फ्लैग मार्च भी किया है. उधर, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोगों से शांति की अपील की है.

मामला क्या है?

अरुणाचल प्रदेश पहले असम का हिस्सा हुआ करता था. 1987 में यह अलग राज्य बना. यहां कुछ हिस्सों में कुछ ऐसी जनजातियों के लोग भी बसते हैं जिन्हें गैर-अरुणाचली कहा जाता है. राज्य के नामसाइ और छांगलांग में जिलों में रहने वाली इन जनजातियों की आबादी 20-25 हजार तक कही जाती है. दशकों से यहां रहे रहे इन लोगों के पास जमीन तो है लेकिन पीआरसी नहीं. इसके चलते उन्हें तमाम दिक्कतें होती हैं.

इस मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बीते साल एक समिति बनाई थी. इसे यह तय करना था कि इन गैर-अरुणाचली जन-जातियों के लिए क्या रास्ता निकाला जाए. इसने अपनी रिपोर्ट में इन छह समुदायों को भी पीआरसी देने की सिफारिश की. यहीं से बवाल शुरू हो गया. विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि ऐसा करने से स्थानीय निवासियों के हित प्रभावित होंगे. उनके मुताबिक सूबे में पहले से ही नौकरियों की समस्या है और इन छह जनजातियों को पीआरसी मिलने से यह और गंभीर होगी.

विपक्षी कांग्रेस ने इस स्थिति के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है. उसने भाजपा के सहयोग से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री पेमा खांडू को बर्खास्त करने की मांग की है. कांग्रेस महासचिव और पूर्वोत्तर प्रभारी लुईजीनो फलेरियो ने एक बयान में कहा, ‘अरुणाचल की स्थिति दुखद है. पीआरसी से लोग आक्रोशित हैं. ऐसा ही नागरिकता विधेयक के मामले में हुआ था. लोगों से विचार-विमर्श किये बिना यह कदम उठाया गया.’

खबरों के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में काफी लोग पहले से ही इस बात से गुस्से में थे कि पेमा खांडू ने नागरिकता संशोधन बिल का भी समर्थन किया जबकि मणिपुर के मुख्यमंत्री ने भाजपा से होते हुए भी इस बिल का विरोध किया था. पीआरसी के मुद्दे पर यह गुस्सा और बढ़ गया. नतीजा हिंसा के रूप में सामने आया.

अब पेमा खांडू ने कहा है कि वे इस मुद्दे को नहीं उठाएंगे. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उनका कहना था, ‘22 फ़रवरी की रात को मैंने मीडिया तथा सोशल मीडिया के ज़रिये साफ किया था कि सरकार इस मुद्दे पर आगे चर्चा नहीं करेगी. आज भी मुख्य सचिव की मार्फ़त एक आदेश जारी किया गया है कि हम पीआरसी मामले पर आगे कार्यवाही नहीं करेंगे.’