आगामी लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी दलों के बीच औपचारिक महागठबंधन बनता नहीं दिख रहा है. ऐसे में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) बनाने पर विचार कर रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इन दलों के नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु संसद की स्थिति हो सकती है. ऐसे में सीएमपी के तहत आने वाले दल सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं.

दरअसल, आम चुनाव से पहले सभी विपक्षी दल भाजपानीत केंद्र सरकार को हर हाल में हराने की बात कर रहे हैं, लेकिन गठबंधन के स्तर पर उनमें एकता नहीं दिख रही है. बजाय इसके राज्यों में छोटे-छोटे गठबंधन देखने को मिल रहे हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी में गठबंधन हुआ है. वहीं, तमिलनाडु में कांग्रेस, डीएमके के साथ चुनाव लड़ेगी. लेकिन उत्तर प्रदेश में सपा व बसपा ने उसे अपने गठबंधन में शामिल नहीं किया है. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के साथ न जाते हुए अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है. आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस और टीडीपी अकेले चुनाव लड़ेंगी. ऐसे में सीएमपी ही एक विकल्प हो सकता है.

लेकिन मतभेद इस पर भी है. रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस, डीएमके और एनसीपी जैसे दल ऐसी किसी घोषणा के लिए तैयार हैं. लेकिन लेफ्ट फ्रंट और अन्य दल पहले किसी संयुक्त अजेंडे पर सहमत होने और उसके बाद एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने के विचार को लेकर आशंकित हैं. सोमवार को सीपीआई-मार्क्सवादी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा था कि वे पहले ही अपनी आपत्तियां कांग्रेस से जता चुके हैं. उन्होंने कहा कि सीएमपी पर सहमत होने के बाद एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने का विचार सही नहीं है.

उधर, मामले से जुड़े दो अन्य नेताओं का कहना है कि सीएमपी का ड्राफ्ट का जल्द से जल्द विपक्षों दलों के बीच साझा किया जा सकता है. बुधवार को संसद परिसर में इन दलों के नेताओं की मुलाकात होनी है. रिपोर्ट के मुताबिक उसी समय ड्राफ्ट साझा किया जा सकता है. यह देखना होगा कि इसे लेकर उनमें सहमति बनती है या नहीं.

अगर इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो संभवतः यह पहला मौका होगा जब आम चुनाव से पहले किसी कॉमन प्रोग्राम के जरिए इस तरह की घोषणा की जाएगी. क्योंकि पारंपरिक रूप से यही देखने में आया है कि सरकार बनने से कुछ समय पहले ही पार्टियां समर्थन देने की घोषणा करती हैं. 1996 में यूनाइटेड फ्रंट और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार इसी तरह बनी थी. 2004 में भी चुनाव परिणाम आने के बाद सीएमपी की घोषणा की गई थी.