भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी को लेकर कई बार यह चर्चा जोर पकड़ती है कि वे कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं. पिछले कुछ दिनों से फिर से इस चर्चा ने जोर पकड़ा है. अब तो यह भी दावा किया जा रहा है कि वरुण गांधी की काफी इच्छा है कि उन्हें कांग्रेस में शामिल कर लिया जाए.

वरुण गांधी के भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने की संभावनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा से पहले उनके और उनकी राजनीति के बारे में कुछ बुनियादी बातें जान लेना जरूरी है. वरुण गांधी उन संजय गांधी के बेटे हैं जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. जब इंदिरा गांधी राजनीति के शीर्ष पर थीं तो उस वक्त संजय गांधी सियासी तौर पर बेहद ताकतवर थे.

लेकिन एक विमान दुर्घटना में अचानक संजय गांधी का निधन हो गया. इसके कुछ साल बाद इंदिरा गांधी की भी हत्या हो गई. इसके बाद राजनीति में काफी कम दिलचस्पी रखने वाले राजीव गांधी को सियासत में आना पड़ा. राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी के संबंध भी सहज नहीं रहे. राजीव गांधी के बाद भी कांग्रेस की राजनीति में पहले उनकी पत्नी सोनिया गांधी प्रमुख भूमिका में रहीं और अब उनकी अगली पीढ़ी के राहुल गांधी और प्रियंका गांधी प्रमुख भूमिका में हैं.

उधर, संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी भाजपा की राजनीति में सक्रिय हुईं. उनके बेटे वरुण गांधी भी 2004 में भाजपा में शामिल हुए. राहुल गांधी की काट के तौर पर भाजपा ने शुरुआत में वरुण गांधी को विकसित करने की कोशिश जरूर की लेकिन तब भी वरुण गांधी ने स्पष्ट कर रखा था कि किसी भी कीमत पर वे न तो सोनिया गांधी के खिलाफ प्रचार करेंगे और न ही राहुल गांधी के खिलाफ. इसी बीच भाजपा की आंतरिक राजनीति भी बदलती रही. कुछ तो इस वजह से और कुछ अपने बड़बोलेपन की वजह से वरुण गांधी भाजपा में हाशिये पर जाते रहे.

वरुण गांधी के साथ काम करने वाले भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘भाजपा को लेकर वरुण गांधी का असंतोष इसी उपेक्षा से उपजा है. उन्हें लगता है कि भाजपा ने उन्हें सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया. उन्हें यह भी लगता है कि अगर पार्टी ने ठीक से उन्हें मौका दिया होता तो वे राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के नेता के तौर पर उभर सकते थे. केंद्र में सरकार बनने पर उनकी मां मेनका गांधी को मंत्री तो बनाया गया लेकिन वरुण गांधी को न तो राष्ट्रीय संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी दी गई और न ही उत्तर प्रदेश चुनावों में उनकी कोई भूमिका तय की गई. इन वजहों से वरुण गांधी भाजपा में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.’

बताया यह जा रहा है कि इन वजहों से ही वरुण गांधी कांग्रेस में जाने का मन बना रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष और वरुण गांधी के चचेरे भाई राहुल गांधी मोदी सरकार को घेरने के लिए किसानों की बदहाली का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं. हाल ही में वरुण गांधी ने भी देश में खेती-किसानी की समस्या पर एक किताब लिखी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा करके वरुण गांधी खुद के लिए कांग्रेस में संभावनाएं टटोलने की कोशिश कर रहे हैं.

वरुण गांधी तो कांग्रेस में जाना चाहते हैं, लेकिन क्या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी उन्हें पार्टी में लेना चाहता है? सत्याग्रह ने कई कांग्रेसी नेताओं से इस सिलसिले में बात की. उनमें से दो ने यह बताया कि इस संदर्भ में वरुण गांधी की बातचीत प्रियंका गांधी से हुई है. इन दोनों नेताओं ने यह दावा भी किया कि प्रियंका गांधी इस पक्ष की हैं कि उन्हें कांग्रेस में लाकर उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव भी लड़ाना चाहिए. वैसे भी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, इन तीनों में से वरुण गांधी को प्रियंका गांधी के करीब माना जाता है. गांधी परिवार की जानकारी रखने वाले लोग यह कहते हैं कि इन तीनों में से प्रियंका गांधी ही हैं, जो वरुण गांधी के प्रति सबसे नरम हैं और उनसे संवाद बनाए रखती हैं.

अगर प्रियंका गांधी अपने चचेरे भाई वरुण गांधी को पार्टी में शामिल कराना चाहती हैं तो फिर अड़चन क्या है? इस सवाल के जवाब में इन दोनों नेताओं से अलग-अलग हुई बातचीत में एक ही बात सामने आई. इनमें से एक नेता का कहना था, ‘वरुण गांधी की पहली अड़चन तो सोनिया गांधी हैं और उनकी दूसरी अड़चन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी.’ सोनिया गांधी भले ही कांग्रेस के रोजमर्रा की गतिविधियों में शामिल नहीं हों लेकिन मेनका गांधी से उनकी अदावत पुरानी है. ऐसे में कांग्रेस के अंदर यह माना जा रहा है कि सोनिया शायद ही वरुण को कांग्रेस में लाने के लिए तैयार हों. लेकिन साथ ही ये कांग्रेसी नेता यह भी कहते हैं कि अगर राहुल और प्रियंका में सहमति बन जाए तो फिर सोनिया गांधी को कोई खास आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

इसका मतलब यह है कि आज की जो स्थिति है उसमें वरुण गांधी के कांग्रेसी होने के लिए राहुल गांधी की सहमति नहीं मिली है. जिन दो कांग्रेसी नेताओं का जिक्र यहां किया गया है कि उन दोनों ने तो यह दावा भी किया कि पिछले कुछ समय से वरुण गांधी लगातार राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन राहुल ने अब तक उन्हें मिलने का वक्त नहीं दिया है.

तो क्या राहुल गांधी नहीं चाहते कि वरुण गांधी पार्टी में आएं? इसके जवाब में इनमें से एक नेता कहते हैं, ‘वरुण गांधी ने भाजपा में रहते हुए अपनी छवि आक्रामक हिंदुत्व की बात करने वाले नेता की बनाई. राहुल गांधी को संभवतः इसी बात से दिक्कत है. राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए जिस तरह से आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं, उसमें उन्हें यह लग रहा होगा कि वरुण गांधी को पार्टी में लाने से उनकी पुरानी छवि पर भी बात उठेगी.’ वे आगे जोड़ते हैं, ‘हालांकि, हाल के दिनों में वरुण गांधी ने किताब लिखकर या संसद में बहसों के दौरान किसानों के मुद्दों को जिस तरह से उठाया है उससे शायद राहुल भविष्य में उन्हें कांग्रेस में लाने से संबंधित कोई निर्णय ले पाएं.’