दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिन के अंदर कई ऐसी घटनाएं हुई जिनका आपस में जबरदस्त कनेक्शन है. बुधवार सुबह जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां मौजूद थे, उसी वक्त खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौर तेजी से आगे बढ़े और प्रधानमंत्री से कुछ कहा. इसके बाद पीएमओ के एक अफसर ने उनके हाथ में एक चिट पकड़ाई और प्रधानमंत्री कार्यक्रम से चले गए. सूत्रों के मुताबिक इस कागज के टुकड़े में भारतीय वायु सेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के बारे में लिखा था.

मोदी सरकार के एक उच्चपदस्थ अधिकारी के मुताबिक बुधवार को हालात युद्द के बेहद करीब पहुंच गए थे. पाकिस्तान के दस एफ-16 जंगी जहाज तीन पाकिस्तानी शहरों से उड़े और फिर एलओसी के पास उन्होंने एक साथ फॉरमेशन बनाया. भारतीय वायुसेना के रडार को खबर लगी और दो मिग 21 बाइसन और तीन सुखोई पाकिस्तानी जंगी जहाजों को रोकने के लिए आगे बढ़े.

भारतीय वायुसेना के मुताबिक पाकिस्तानी एफ 16 भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करना चाहते थे लेकिन जैसे ही मिग और सुखोई वहां पहुंचे वे खाली जगह पर बम गिराकर वापस लौटने लगे. तभी मिग 21 बाइसन उड़ा रहे विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने एक एफ-16 का पीछा किया और एफ-16 को उड़ा दिया. इसके बाद एक पाकिस्तानी जंगी जहाज ने उन पर एक मिसाइल से हमला किया और अभिनंदन का मिग क्रैश हो गया, लेकिन वे पैराशूट के जरिए कूद गए. तेज हवा की वजह से विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लैंड हुए.

उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विज्ञान भवन में युवाओं के बीच थे. वहां से वे सीधे सिच्युएशन रूम में पहुंचे और फिर अभिनंदन की देश वापसी का अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. उच्च सरकारी सूत्रों से बात करने पर पता चला कि इसके बाद सेना की रणनीति की जगह कूटनीति पर चर्चा शुरू हुई. इसमें तीन देशों की भूमिका सबसे अहम रही - अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब.

इस कूटनीतिक मिशन से जुड़े एक सूत्र बताते हैं कि इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रोल भी बेहद पॉजिटिव था. इस मसले पर भारत के साथ अमेरिका ने पूरा सहयोग किया. यही वजह है कि वियतनाम से ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूरी दुनिया को सबसे पहले बता दिया कि अच्छी खबर मिलने वाली है. इस मामले में भारत का कहना था कि अमेरिका ने पाकिस्तान को जिन शर्तों के साथ एफ-16 जंगी जहाज दिए थे उनमें सबसे पहली शर्त यही थी कि ये जहाज सिर्फ आतंकवादियों को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे और पाकिस्तान इनका उपयोग भारत के खिलाफ नहीं करेगा.

इसमें दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका अबू धाबी की रही. इस मसले पर वहां के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायेद से इमरान खान ने बात की. वे चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत हो. लेकिन भारत किसी भी सूरत में ऐसा करने के लिए तैयार नहीं था. इसीलिए पाकिस्तानी संसद में इमरान खान ने कहा कि उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने की कई दफा कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई. सुनी-सुनाई है कि भारत की सबसे बड़ी शर्त थी कि जब तक अभिनंदन की देश वापसी नहीं होगी वह बात नहीं करेगा.

इसके बाद इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में ही एलान किया कि वे भारत के पायलट अभिनंदन वर्तमान को छोड़ रहे हैं. जब उन्होंने नेशनल एसेंबली में यह बयान दिया तब भी प्रधानमंत्री मोदी विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम में थी. वहां उन्हें इस बात की पक्की खबर दी गई कि आखिरकार पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम ने सार्वजनिक तौर पर ऐलान कर दिया है. और चूंकि ये बयान पाकिस्तानी संसद में दिया गया है इसलिए अब पाकिस्तान के इससे पीछ हटने का सवाल ही नहीं उठता.

इस खबर की पूरी पुष्टि होने के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘अभी-अभी एक पायलट प्रोजेक्ट हो गया’. इसके बाद नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संपर्क स्थापित हुआ और अभिनंदन को भारत लाने की सारी औपचारिकता पूरी की गई.

2008 के मुंबई हमले के बाद यह पहला मौका था जब भारत और पाकिस्तान जंग के मुहाने पर खड़े थे. अब सवाल यह उठता है कि आगे क्या होगा? सरकारी और गैर सरकारी दोनों ही सूत्र बताते हैं कि फिलहाल तनाव रहेगा लेकिन शायद युद्ध जैसे हालात नहीं बनेंगे. भारत ने पाकिस्तान को जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ सबूत दिए हैं और अमेरिका ने भी पाकिस्तान को चेताया है. ऐसे में अगले कुछ महीनों में पाकिस्तान को जैश के खिलाफ कुछ एक्शन लेना होगा और तब तक भारत में भी चुनाव हो चुके होंगे. मतलब मई-जून तक अब शांति की उम्मीद की जा सकती है.

लेकिन ऐसा नहीं है कि जंग के बादल हमेशा के लिए छंट गए हैं. मोदी सरकार के सूत्रों के मुताबिक अगर ‘पुलवामा’ जैसा कुछ और हुआ तो हालात और खराब हो जाएंगे.