आगामी लोकसभा चुनावों से पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो सकता है. खबर है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस संबंध में ‘आप’ से बातचीत शुरू करने की इजाजत दे दी है. हिंदुस्तान टाइम्स ने इस मामले से जुड़े कांग्रेस नेताओं के हवाले से यह खबर दी है.

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को दोनों पार्टियों के बीच संपर्क हुआ था. कांग्रेस आलाकमान से नजदीकी रखने वाले एक शीर्ष रणनीतिज्ञ ने ‘आप’ के एक वरिष्ठ नेता से बातचीत की थी. नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कांग्रेस के एक नेता ने यह भी बताया कि राहुल गांधी की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली में अपने उन नेताओं को मनाने में लगा था जो ‘आप’ के साथ गठबंधन करने के खिलाफ थे. इनमें वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अजय माकन भी शामिल थे. खबर के मुताबिक कांग्रेस नेता ने कहा, ‘अगर सब सही रहा, तो हम लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा से पहले गठबंधन कर लेंगे.’

दिल्ली से लोकसभा की सात सीटें आती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस दिल्ली के सत्तारूढ़ दल को तीन-तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारने का सुझाव दे सकती है. वहीं, सातवीं सीट के लिए उम्मीदवार आपसी सहमति से उतारा जाएगा या उस पर किसी नामी हस्ती को चुनाव लड़ाया जाएगा. हालांकि ‘आप’ शायद इस प्रस्ताव को नकार दे और दोनों तरफ से काफी मोल-तौल किया जाए. ‘आप’ के एक वरिष्ठ नेता के बयान से यह साफ हो जाता है. उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में हमारे पास (70 विधानसभा सीटों में से) 67 सीटें हैं. हम कैसे 3+3+1 का फॉर्मूला मान लें. हम दिल्ली की छह और पंजाब में चार सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, चंडीगढ़ को छोड़ कर. इसके बदले हम कांग्रेस को दिल्ली में एक सीट देंगे. हरियाणा और गोवा के लिए हम बातचीत करने को तैयार हैं.’

लेकिन कांग्रेस नेताओं ने साफ किया कि यह गठबंधन सिर्फ दिल्ली के लिए होगा. रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल गठबंधन को दिल्ली तक ही सीमित रखा जाएगा. इस संबंध में दिल्ली में कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समेत अपने वरिष्ठ सहयोगियों से बातचीत करना भी शुरू कर दिया है.

विपक्षी दलों की बैठक में उठा था मुद्दा

कांग्रेस के एक अन्य नेता के मुताबिक बीती 13 फरवरी को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के घर पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में दिल्ली के लिए गठबंधन की जरूरत पर बातचीत हुई थी. बैठक में विपक्षी नेताओं ने राहुल गांधी से दिल्ली को लेकर उनके रुख पर बात की थी. उस समय गांधी ने कहा था कि उनकी पार्टी की दिल्ली इकाई इस गठबंधन के खिलाफ है. लेकिन बातचीत में यह बात हावी रही कि अगर भाजपा को दिल्ली में हराना है तो गठबंधन करना जरूरी होगा.

वहीं, कांग्रेस को अपने एक अंदरूनी सर्वेक्षण से भी पता चला है कि फिलहाल वह दिल्ली में एक भी संसदीय सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में उसके और ‘आप’ के बीच वोट बंटने की सूरत में भाजपा सातों की सातों सीटें जीत जाएगी. इस पर कांग्रेस के तीसरे नेता ने कहा, ‘हम विचारधारा के आधार पर गठबंधन नहीं करने जा रहे. इसका एक मात्र उद्देश्य भाजपा को हराना है. तेलंगाना में हमने ऐसी पार्टी (टीडीपी) से गठबंधन किया जो कांग्रेस-विरोधी रही है. पश्चिम बंगाल में हमने टीएमसी और लेफ्ट दलों दोनों के साथ हाथ मिलाया है. इसी तरह दिल्ली में ‘आप’ के साथ रहेगा.’