जी, नमस्कार... कैसे हैं आप?

क्या नमस्कार-वमस्कार लगा रखा है! सीधे सवाल पर आइए.

आप टीवी के इतने बड़े एंकर हैं. ऐसा व्यवहार आप को शोभा नहीं देता?

अरे, चुप रहिए. हम एंकर इतनी बदतमीजी तो शांतिकाल में कर देते हैं. यह तो वैसे भी युद्धकाल है. खैर, मनाओ की मैंने एकाध रैपट नहीं लगा दिया. देश युद्ध के मुहाने पर खड़ा है और आप जैसे लोग व्यवहार में शोभा को ढूंढ रहे हैं. अरे, शर्म करनी चाहिए. लेकिन आप क्यों राजनीति से बाज आएंगे? ‘क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो/ उसको क्या जो दंतहीन विषहीन विनीत सरल हो.’

इस समय इस कविता का क्या मतलब?

कविता से आप मान गए न कि मेरे पास गरल यानी विष है. यह विष मैं स्क्रीन पर ग्राफिक्स से बने पाकिस्तान के नक्शे पर उड़ेल कर, इमरान खान के कैरीकेचर को ऐसे डस लूंगा कि वह लड़खड़ाता हुआ दिखेगा और पानी भी नहीं मांग पाएगा. बैकग्राउंड में म्यूजिक बजेगा- मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा... फिर स्क्रीन पर मेरी आवाज आएगी. रुकते हैं- एक कमर्शियल ब्रेक के लिए. लौट कर फिर पाकिस्तान को मजा चखाएंगे. और...हां चैनल मत बदल दीजिएगा, वर्ना क्राइम बुलेटिन में हमारा एंकर कहेगा – गौर से देख लीजिए इस देशद्रोही को. जब टीवी पर पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी जा रही थी. तब इसने चुपके से चैनल बदल लिया. और ये देशद्रोही यहीं पर नहीं रुका, हद तो तब पार हो गई जब कई चैनल पर घूमने के बाद इसने टीवी ही बंद कर दिया.

आजकल आप हवा में घूंसे मार-मारकर ऐसी भाषा में समाचार पढ़ रहे हैं जैसे लोगों को युद्ध के लिए उकसा रहे हों. युद्धों में कई मासूम मारे जाते हैं. ऐसे मौकों पर थोड़ी गंभीरता से बात कहनी चाहिए.

युद्ध के लिए लोगों को उकसा रहा था तो क्या गलत कर रहा था! बीते दिनों देश के आधे से ज्यादा लोग तो बेकार पड़े सोशल मीडिया पर ज्ञान बघार रहे थे इतने लोगों को रोजगार नहीं मिला. उतने किसानों की हालत ठीक नहीं है. वगैरह,वगैरह. देश के लिए किसी के पास टाइम नहीं है. हमने माहौल बनाया तो फालतू की बहसों के बजाय यह सार्थक चर्चा शुरू हुई कि युद्ध होना चाहिए या नहीं. मेरे फेसबुक पेज पर तो कई भावुक करने वाले मैसेज आए. एक ने लिखा था - मैं पहले युद्ध के पक्ष में नहीं था, लेकिन आपका शो देखकर हृदय परिवर्तन हो गया. अब बर्गर चाहे जिंदगीभर बिना सॉस-केचप के खाना पड़े, लेकिन युद्ध जरूर होना चाहिए.

बालाकोट पर हवाई हमले के बाद भारत ने मरने वाले आतंकियों का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया था, फिर आप लोग मनमाने आंकड़े क्यों दे रहे थे? ऐसे में संयम बरतना चाहिए. इससे कई बार सरकार-सेना के लिए भी दिक्कत हो जाती है.

सुनिए, मसला जब देश और टीआरपी का आता है तो हम सेना-सरकार क्या अपनी अंतरात्मा तक की नहीं सुनते. नेताओं की अंतरात्मा तो कभी-कभार जाग भी जाती है, लेकिन हम अपनी अंतरात्मा को स्लीपिंग पिल देकर और मोबाइल ऑफ करके सुलाते हैं ताकि संयम-वंयम वाली कोई बात आए तो वो जागकर हमें परेशान न कर पाए. सेना या सरकार बताए, चाहे न बताए, हम मारे गए आतंकियों की संख्या किसी भी हालत में अपने प्रतिद्वंदी चैनल से कम नहीं बता सकते. आप क्या चाहते हैं! जनता हमें धिक्कारे, ये देखो गद्दार चैनल.

लेकिन, आप लोग ऐसे आंकड़े लाते कहां से हैं?

थोड़ा तमीज से बात कर ली तो ज्ञान देने लगे. बुद्धिजीवीपन की आड़ में दिखाने लगे अपना असली चेहरा. बगल, वाले चैनल से तो कभी नहीं पूछा कि उसने ये आंकड़े कहां से दिखाए. कभी, उससे भी पूछो.

आप बात घुमाकर सवाल से नहीं बच सकते. हमारा पायलट पाकिस्तान के कब्जे में था और आप लोगों ने उसके घर-परिवार की लोकेशन तक चैनल पर दिखा दी? यह बेतुकापन नहीं है?

हां, दिखाई थी तो? पर साथ में पब्लिक से अपील भी तो की थी कि हमारे पायलट के फोटो शेयर न करें. ये तो नहीं दिखा तुम्हें! बस, सवाल कर मीनमेख निकाले जा रहे हो. एक बार मुंह से तारीफ के बोल तक नहीं निकले. कम से कम यही कह देते कि इस तनाव के दौरान युद्ध के मोर्चे पर न्यूज एंकरों ने सेना जैसा ही साहस दिखाया.

पाकिस्तान के न्यूज चैनलों पर भी काफी आक्रामक माहौल था, मुकाबला काफी कड़ा था.

देखिए, पाकिस्तान के खिलाफ एक प्रेशर तो होता ही है. अब क्रिकेट टीम को ही ले लीजिए. लेकिन हम लोग बिलकुल दबाव में नहीं थे. शुरू में ही पाकिस्तान ने तौबा बोल दिया. हां, लेकिन झूठ नहीं बोलना चाहिए. वो उनकी एक एंकर थी जो ऐसे बोलती है- ओए बीवी सुन लो.... इंडिया जब पाकिस्तान की तरक्की देखेगा तो उसको बुखार आ जाएगा...टीवी तक होने के चांसेज हैं. उसने जरूर कड़ी टक्कर दी हमें. हम लोग बोलते समय थोड़ा बहुत दिमाग लगा लेते हैं... लेकिन उससे मैंने सीखा कि न्यूज रूम में अच्छा परफॉर्म करने के लिए दिमाग को घर पर ही छोड़कर आना चाहिए.

अच्छा यह बताइए कि भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव पर सरकार की कूटनीति कैसी रही?

ठीक-ठाक ही रही. ज्यादातर चीजें हम लोगों ने टीवी पर बताई ही थीं. सरकार को उसका फायदा मिला होगा. बाकी लास्ट, में टीवी चैनलों को बाघा बॉर्डर वाला फुटेज नहीं मिला, यह एक बड़ी चूक रही. हमें उस पाकिस्तानी वीडियो से काम चलाना पड़ा, जिसमें 16 कट लगे थे.