बीती 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ मेले में सफाई का काम करने वाले पांच सफाईकर्मियों के पांव धोए थे. ये पांचों सफाईकर्मी उस क्षण को अभी तक भूले नहीं हैं. हालांकि उस यादगार लम्हे के बाद भी इनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक ये पांचों सफाईकर्मी उस दिन के अनुभव को याद कर खुश होते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात नहीं रख पाने का मलाल भी इनके चेहरे पर साफ दिखता है.

होरी लाल

होरी लाल (35) उन्हीं पांच सफाईकर्मियों से एक हैं. वे उत्तर प्रदेश के धोरैता का गांव से कुंभ मेले में काम करने आए थे. प्रधानमंत्री के साथ बिताए समय को याद करते हुए वे कहते हैं, ‘हमें बताया गया था कि वे (नरेंद्र मोदी) हमसे मिलेंगे, न कि हमारे पैर धोएंगे.’ होरी का कहना है कि इतने बड़े व्यक्ति का उनके पैर धोना उन्हें काफी लज्जाजनक लगा. वाल्मीकि समाज के होरी नरेंद्र मोदी को ‘महान व्यक्ति’ बताते हुए कहते हैं, ‘हमारी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है. हम पहले भी सफाई का काम कर रहे थे और अब भी यही कर रहे हैं.’

होरी यह भी कहते हैं कि उन्हें सफाई करने का काम पसंद नहीं. वे कहते हैं, ‘मुझे काम के लिए यहां-वहां जाना अच्छा नहीं लगता. काम कुछ भी हो, पक्का होना चाहिए. प्रधानमंत्री जी अगर नौकरी दे देते तो सही होता.’ वहीं, उस क्षण को याद करते हुए होरी कहते हैं, ‘सपने में वही मौका दिखता है जब सारे कैमरे हमारा फोटो ले रहे थे.’

प्यारे लाल

होरी लाल की तरह प्यारे लाल (40) भी उन पांच सफाईकर्मियों में से एक थे. उनका कहना है कि अच्छा होता अगर उन्हें प्रधानमंत्री से मिलने का और मौका मिला होता. प्यारे लाल कहते हैं कि वे प्रधानमंत्री से मिले सम्मान को महसूस करते हैं. लेकिन वे यह भी कहते हैं, ‘वे (मोदी) हमसे मुश्किल से एक मिनट मिले होंगे. मुझे उनसे बात करने का भी मौका नहीं मिला.’

पेशे से दिहाड़ी मजदूर प्यारे लाल नवंबर से कुंभ में सफाईकर्मी का काम रहे हैं. वे यहां अपनी पत्नी के साथ आए हैं. उनका कहना है कि सफाई के बदले जो पैसा उन्हें मिलता है वह काफी नहीं है. वे कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री को हमारे वेतन बढ़ाने चाहिए थे. हम अपने घर छोड़ कर यहां आते हैं.’ प्यारे लाल का वेतन तो नहीं बढ़ा, लेकिन होरी की तरह वे भी इस बात से खुश हैं कि प्रधानमंत्री उनसे मिले. उन्होंने वह गमछा अभी तक उतारा नहीं है जो उन्हें प्रधानमंत्री से मिला था.

ज्योति मेहतर

21 साल ज्योति मेहतर भी उन पांच सफाईकर्मियों में शामिल थीं. उनके पति बबलू (23) भी सफाईकर्मी हैं. ज्योति अपनी स्थिति से निराश होकर कहती हैं कि उन्हें हर दिन 500 रुपये मिलने चाहिए. उनके मुताबिक इस काम में बिलकुल सुख नहीं है. वे इस बात से खासी गुस्से में दिखीं कि मोदी से मुलाकात के बाद उन्होंने जो कहा उसे मीडिया ने नहीं दिखाया. वे कामना करती हैं कि प्रधानमंत्री को अपनी हालत के बारे में बताएं. उन्होंने कहा, ‘वे इतने बड़े आदमी हैं. मैं कैसे अचानक कुछ कह सकती थी?’

ज्योति अपने पति के लिए नौकरी चाहती हैं. उन्होंने कहा, ‘वे कुछ भी कर सकते हैं. सम्मान से रोजी नहीं चलती.’ ज्योति यह भी चाहती हैं कि हाथ से मैला उठाने या सीवर साफ करने का काम खत्म हो जाए. उन्होंने कहा, ‘लोगों की गंदगी साफ करने के लिए किसी को सीवरों में नहीं उतरना चाहिए. जो काम मशीन कर सकती है, उसे इंसान को क्यों करना चाहिए? ‘

नरेश कुमार

एक और सफाईकर्मी नरेश कुमार (28) कहते हैं कि सरकार गरीब लोगों की अनदेखी करती है. उन्होंने कहा कि जाति सबसे बड़ा मुद्दा है. वाल्मीकि समाज के नरेश ने कहा, ‘हम यह काम करते रहे हैं और करते रहेंगे.’ नरेश के मुताबिक प्रधानमंत्री का उनके पैर धोना सम्मान की बात है, लेकिन उन्हें कुछ कहने का मौका नहीं दिया गया. वे सरकार से वेतन बढ़ाने और छुआछूत खत्म करने को लेकर बात करना चाहते थे. नरेश ने अखबार से कहा, ‘देश में बदलाव आना चाहिए. वह नहीं आ रहा है. गरीब और पिछड़ा आदमी दिक्कत में है.’

चौबी

34 वर्षीय चौबी के पैर भी प्रधानमंत्री मोदी ने धोए थे. उस दिन को याद करते हुए वे बताती हैं कि वे सुबह जल्दी नहाकर 11 बजे सेक्टर-1 स्थित हॉल में पहुंच गई थीं. उन्होंने बताया कि वहां बाकी चार सफाईकर्मियों के साथ उन्होंने इंतजार किया. शाम को प्रधानमंत्री वहां पहुंचे. वहीं, उनके पति अमरीश कहते हैं कि उनकी पत्नी ने प्रधानमंत्री से कुछ नहीं कहा, लेकिन अगर उन्हें मौका मिलता तो वे कुछ कहते. वहीं, चौबी ने कहा कि वे खुश नहीं हैं. उन्होंने अपने पति की बात पर कहा, ‘जब वहां होते तो पता चलता. सिर्फ पांच मिनट के लिए मिले वो हम पांच लोगों से.’ चौबी ने यह भी कहा कि उनका वेतन 15,000 से बढ़ा कर 20,000 किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को कुछ करना चाहिए.