राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने जर्मनी की कार कंपनी फॉक्सवैगन इंडिया पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. खबरों के मुताबिक जुर्माने की यह रकम चुकाने के लिए एनजीटी ने कपंनी को दो महीने का वक्त दिया है. कंपनी के खिलाफ यह जुर्माना अपनी डीजल कारों में उत्सर्जन (नाइट्रोजन ऑक्साइड का) छुपाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करके पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाया गया है.

गुरुवार को यह फैसला एनजीटी के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने सुनाया. इस खंडपीठ ने यह भी कहा कि टिकाऊ विकास के लिए तय नियमों का ध्यान रखा जाना जरूरी है. इसके साथ ही खंडपीठ ने वायु प्रदूषण निगरानी कमेटी को सलाह दी कि वह चाहे तो जुर्माने की रकम को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए भी इस्तेमाल कर सकती है.

इससे पहले एक स्कूल के शिक्षक सहित कुछ अन्य लोगों ने फॉक्सवैगन की कारों द्वारा उत्सर्जन नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई थी. साथ ही इस कंपनी की कारों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की थी. इसके मद्देनजर एनजीटी ने जांच के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), भारी उद्योग मंत्रालय, ऑटोमोटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान के प्रतिनिधियों का एक संयुक्त दल गठित किया था.

इस संयुक्त दल ने फॉक्सवैगन को मामले में दोषी पाया था. साथ ही उसने इस नुकसान के बदले कंपनी पर 171.34 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी दिया था. संयुक्त दल की रिपोर्ट के आधार पर नवंबर 2018 में एनजीटी ने फॉक्सवैगन को मामले का दोषी ठहराया था. साथ ही उस वक्त एनजीटी ने इस जर्मन कंपनी को सीपीसीबी के पास 100 करोड़ रुपये की अं​तरिम राशि जमा कराने के आदेश भी दिए थे.