बालाकोट हवाई हमले में ‘ध्वस्त’ हुए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कैंप की कथित तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है. नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्विटर पर एक न्यूज़ चैनल का वीडियो शेयर किया है. इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है, ‘ये तस्वीरें साफ़-साफ़ बता रही हैं कि भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी आतंकी ट्रेनिंग कैंप के परखच्चे उड़ा दिए.’

इस वीडियो में दिख रही दो सैटेलाइट तस्वीरों को भारतीय वायु सेना के हमले से जोड़ कर दिखाया जा रहा है. एक तस्वीर हमले से पहले 23 फ़रवरी की बताई गई है. वहीं, दूसरी तस्वीर को 26 फ़रवरी (हमले के बाद) का बताया गया है.

गिरिराज ने यह वीडियो चार मार्च को शेयर किया था. इसके दो दिन बाद ही अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में हाई-रेज़ोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से कहा था कि बालाकोट के जाबा में जैश-ए-मोहम्मद का मदरसा अब भी पूरी तरह सही सलामत है. रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय वायु सेना के हवाई हमले में उसे कोई नुक़सान नहीं पहुंचा.

वहीं बीबीसी ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गिरिराज सिंह द्वारा शेयर की गईं तस्वीरें रॉयटर्स की रिपोर्ट में दिखाई गई तस्वीरों से मेल नहीं खातीं. संस्थान के मुताबिक़ ये तस्वीरें ‘ज़ूम अर्थ’ नामक वेबसाइट से ली गई हैं. उसने वेबसाइट के संस्थापक पॉल नीव से बात की है. उन्होंने बताया है कि जो (दाईं) तस्वीर सोशल मीडिया पर हवाई हमले के बाद ध्वस्त हुई बिल्डिंग की बताई जा रही है, वो एक पुरानी तस्वीर है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट पर सवाल खड़ा करते हुए कुछ ट्विटर यूज़र्स ने ये वायरल तस्वीरें शेयर की थीं. इनमें से दाईं तस्वीर को लेकर पॉल नीव ने जवाब देते हुए लिखा है, ‘दूसरी तस्वीर ज़ूम डॉट अर्थ से ली गई है. यह (वेबसाइट) हाई रेज़ोल्यूशन के लिए बिंग मैप्स (माइक्रोसोफ़्ट की नक़्शा बनाने संबंधी वेब सर्विस) का इस्तेमाल करती है. यहां रोज़ाना के हिसाब से तस्वीरें उपलब्ध नही हैं.’ बीबीसी के मुताबिक़ पॉल ने यह भी कहा है कि यह तस्वीर कुछ दिन या महीनों नहीं, बल्कि सालों पुरानी होगी, क्योंकि सैटेलाइट तस्वीर में दिख रही इमारत निर्माणाधीन है.

एक ट्विटर यूज़र का सवाल
एक ट्विटर यूज़र का सवाल
ट्विटर यूज़र के सवाल पर पॉल नीव का जवाब
ट्विटर यूज़र के सवाल पर पॉल नीव का जवाब

वहीं, बाईं तस्वीर को लेकर न्यूज़ चैनल ने दावा किया था कि यह हवाई हमले से पहले (23 फ़रवरी) की है. लेकिन कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस दावे पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि अगर यह तस्वीर 23 फ़रवरी की है, तो उसके बाद गूगल मैप पर इस इमारत की हालत बदली हुई क्यों नहीं दिख रही है? उधर, तमाम संदेहों के बावजूद गिरिराज सिंह ने वायरल वीडियो को अपने ट्विटर अकाउंट से नहीं हटाया है.

(अगर आपके पास सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी कोई जानकारी (ख़बर, तस्वीर या वीडियो) आई है, जिसके सही होने पर आपको संदेह हो तो उसे हमें dushyant@satyagrah.com पर भेज दें. हम उसकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेंगे.)