आम चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार वायु सेना द्वारा पाकिस्तान स्थित बालाकोट में एयर स्ट्राइक की कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर रखने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों से इसके साफ संकेत मिल रहे हैं. उधर, भाजपा भी देश के अलग-अलग हिस्सों में विजय संकल्प रैलियों का आयोजन कर रही है. दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां उस पर राजनीतिक फायदे के लिए सेना के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगा रही हैं.

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब केंद्र की सत्ता में रहते हुए भाजपा पर सेना का चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल करने के आरोप लगे हों. इससे पहले साल 1999 के आम चुनाव में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार पर भी कुछ इसी तरह के आरोप लगे थे. चुनाव आयोग ने इस सिलसिले में पार्टी को नोटिस भी जारी किया था. यह अलग बात है कि इसके बावजद पार्टी नेतृत्व के कान पर जूं भी नहीं रेंगी थी.

हालांकि, इस कवायद का भाजपा को कोई खास फायदा नहीं हुआ. 1998 के चुनाव की तरह 1999 में भी उसकी सीटों की संख्या 182 पर ही थमी रही. इन चुनाव में एक खास बात यह भी थी कि नरेंद्र मोदी इसमें अहम भूमिका में थे. वे बतौर पार्टी महासचिव भाजपा के चुनावी अभियान की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ नरेंद्र मोदी | साभार : narendramodi.in
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ नरेंद्र मोदी | साभार : narendramodi.in

1999 के आम चुनाव से करीब तीन महीने पहले देश को पाकिस्तान के साथ एक और युद्ध (कारगिल) का सामना करना पड़ा था. इससे पहले अप्रैल, 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने की सरकार केवल एक वोट से गिर गई थी. इसके बाद बारिश के मौसम को देखते हुए चुनाव आयोग ने सितंबर-अक्टूबर में चुनाव की तारीखें तय की. इस बीच कारगिल युद्ध में जीत ने कार्यकारी वाजपेयी सरकार के मनोबल को कहीं ऊंचा कर दिया था. इसके जरिए मतदाताओं को अपनी ओर खींचने और विपक्ष पर हमलावर होने की लगातार कोशिश की जा रही थी.

जनसत्ता के पूर्व संपादक प्रभाष जोशी ने 29 अगस्त, 1999 को अपने एक आलेख में लिखा है कि उन दिनों हरियाणा के करनाल में एक चुनावी सभा हुई थी. इसमें अटल बिहारी वाजपेयी भी मौजूद थे. इस सभा के लिए तैयार मंच के पीछे एक बड़ा सा चित्र लगाया गया था. इस तस्वीर में तोलोलिंग की चोटी पर विजयी सैनिकों को दिखाया गया था. साथ ही, तीनों सेनाओं के प्रमुख वर्दी में अपनी-अपनी उंगलियों से विक्ट्री साइन बनाते हुए दिखाए गए थे. प्रभाष जोशी ने लिखा है, ‘प्रधानमंत्री इसके पहले और बाद भी कहते-कहते नहीं थकते थे कि कारगिल में विजय देश और सेनाओं की हुई है. लेकिन, यह विशाल चित्र सेना ही नहीं, सेनापतियों को भी विजय का चिन्ह बनाए भाजपा के पीछे खड़ा दिखा रहा था.’

बताया जाता है कि चुनाव आयोग ने इस बारे में भाजपा को नोटिस जारी किया था. वहीं, भाजपा ने भी माना कि उससे गलती हुई. प्रभाष जोशी ने लिखा है कि इसके बाद पार्टी की ओर से नरेंद्र मोदी ने माफी मांगी थी. इस जनसभा की जिम्मेदारी उनके ही हाथों में थी. इस घटना को लेकर नरेंद्र मोदी ने तो माफी मांग ली. लेकिन, अटल बिहारी वाजपेयी के बचाव में यह कहा गया कि अपने बॉडीगार्ड्स से घिरे होने की वजह से वे मंच पर जाते हुए और वहां बैठने के दौरान उस विशाल तस्वीर को देख नहीं पाए. उस वक्त इस बारे में पार्टी द्वारा दी गई सफाई की मानें तो मंच से उतरते हुए वाजपेयी की नजर इस तस्वीर पर पड़ी थी और उन्होंने इस पर अपनी नाराजगी भी जताई थी.

लेकिन, नाराजगी के इस दावे की केवल दो दिन बाद ही गुजरात के कापड़वंच में आयोजित एक चुनावी सभा में हवा निकल गई. इस सभा में भी पहले की तरह कारगिल का पोस्टर लगाया गया. साथ ही, इस लड़ाई में शहीद हुए दिनेश वाघेला के माता-पिता को मंच पर बुलाकर प्रधानमंत्री से मिलवाया गया.

चुनाव आयोग के साथ-साथ भारतीय सेना ने भी खुद को राजनीतिक फायदे के लिए पार्टियों के बीच जुबानी जंग में घसीटे जाने पर संज्ञान लिया था. इसे लेकर तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वेद प्रकाश मलिक को कहना पड़ा था कि उन्हें (सेना) उनके हाल पर छोड़ दिया जाए.

इससे पहले भी नरेंद्र मोदी कारगिल युद्ध के दौरान लगातार अपनी राष्ट्रवादी छवि बड़े फलक में लोगों के सामने लाने की कोशिश करते दिखे थे. ‘नरेंद्र मोदी : एक शख्सियत, एक दौर’ के लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने पत्रकार विनोद के जोस का हवाला देकर एक घटना का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा है कि उस वक्त एक टेलिविजन बहस के दौरान पाकिस्तान के उकसावे के बारे में उनका जवाब था, ‘चिकन बिरयानी नहीं, गोली का जवाब बम से दिया जाएगा.’

बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद कई मौकों पर दिए गए उनके बयान भी 20 पहले वाले नरेंद्र मोदी की याद दिलाते दिखते हैं. बीती 28 फरवरी को उन्होंने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन के एक कार्यक्रम में भारतीय पायलट अभिनंदन को पाकिस्तान द्वारा छोड़े जाने को ‘पायलट प्रोजेक्ट’ की सफलता बताया था. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी जोड़ा कि अभी ‘रियल’ होना बाकी है. इसके बाद नरेंद्र मोदी लगातार अपनी जनसभाओं में कहते दिखाई दे रहे हैं कि वे आतंकवाद खत्म करना चाहते हैं लेकिन, विपक्ष उन्हें खत्म करना चाहता है.

वहीं, कारगिल युद्ध के बाद भाजपा के चुनावी अभियान की पुनरावृति 20 साल बाद 2019 के चुनाव से पहले भी दिख रही है. इस हमले के बाद भाजपा नेताओं की जनसभाओं में मंच पर पुलवामा हमले में शहीद जवानों की तस्वीरें लगाए जाने की खबरें आ रही हैं. वहीं, अलग-अलग जगहों पर कई ऐसे भी होर्डिंग भी दिखे हैं, जिनमें श्रद्धांजलि तो शहीदों को दी गई है लेकिन चेहरे शीर्ष पार्टी नेताओं के दिख रहे हैं. बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भाजपा इसे सरकार की बड़ी जीत बताकर देश के अलग-अलग कोनों में विजय संकल्प रैलियां भी निकाल रही है.