राजनीतिक रूप से अति संवेदनशील माने जाने वाले अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक समिति गठित की है. इस समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला को सौंपी गई है. साथ ही आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को भी इसमें शामिल किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर एफएमआई कलीफुल्ला ने कहा है, ‘खबरों के जरिये मुझे पता चला है कि शीर्ष न्यायालय ने मेरी अध्यक्षता में मध्यस्थता समिति गठित की है. लेकिन मुझे अब तक इस आदेश की कोई लिखित प्रति नहीं मिली है. मैं यह जरूर कहूंगा कि अगर ऐसी समिति का गठन हुआ है तो इस मसले को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे.’ वहीं श्रीश्री रविशंकर ने कहा, ‘इस समस्या के हल के लिए हम सबके सम्मान, सदियों के संघर्ष का सुखद अंत और समाज की समरसता का लक्ष्य लेकर चलेंगे.’

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर मुस्लिम समुदाय के अलावा संत समाज और राजनीतिक हलकों से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं :

उमा भारती, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता -

‘हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं. लेकिन हम राम के भक्त भी हैं. ऐसे में मैं यह कहूंगी कि जिस तरह वेटिकन सिटी में मस्जिद नहीं बन सकती, मक्का-मदीना में मंदिर नहीं बन सकता, उसी तरह से जहां रामलला विराजमान हैं वहां कोई दूसरा धार्मिक स्थल नहीं बन सकता.’ उन्होंने आगे कहा, ‘अच्छा होगा कि सभी लोग मिलकर राम मंदिर के निर्माण के लिए काम करें.’

सुब्रमण्यम स्वामी, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद -

‘कांग्रेस आज इटली के प्रभाव में आकर इस मामले को घुमाने का प्रयास कर रही है. यह बेहद दुखद है कि देश के केवल दो प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पीवी ​नरसिंह राव ने ही राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को सुलझाने की कोशिश की.’

केशव प्रसाद मौर्य, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री -

‘उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते. लेकिन आपसी बातचीत से इस मसले का समाधान निकालने की पहले भी कोशिश की गई थी पर उसमें सफलता नहीं मिली. भगवान राम के भक्त और संतों की इच्छा है कि अयोध्या में जल्द से जल्द राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू हो.’

मायावती, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष -

‘अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेक नीयत के साथ ईमानदार प्रयास किया है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस फैसले का स्वागत करती है.’

स्वामी चक्रपाणि, हिंदू महासभा के प्रमुख -

‘विवाद को सुलझाने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को स्वीकार करते हैं. विवाद के निपटारे के लिए शीर्ष अदालत ने श्रीश्री रविशंकर के नाम को भी तीन सदस्यों की समिति में शामिल किया है, यह अच्छी बात है. हम उम्मीद करते हैं कि इस मसले को सुलझाने के लिए हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों के लोग ​मिलकर काम करेंगे.’

जफरयाब जिलानी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य -

‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहले भी कह चुका है कि मध्यस्थता प्रक्रिया में वह अपना पूरा सहयोग करेगा. अब आगे इस मसले को लेकर जो भी कुछ कहना होगा हम मध्यस्थता समिति से कहेंगे.’

असदुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के प्रमुख-

‘शीर्ष अदालत ने मध्यस्थता समिति में श्रीश्री रविशंकर को भी शामिल किया है. इस मुद्दे पर उन्होंने कहा था कि अगर अयोध्या की विवादित जमीन पर मुसलमान अपना दावा नहीं छोड़ते तो भारत सीरिया बन जाएगा. मैं समझता हूं कि उनके बजाय इस समिति में किसी तटस्थ व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए था.’ उन्होंंने आगे कहा, ‘सबसे अच्छी बात यह है कि इस समिति की बैठकों की रिपोर्टिंग पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है. यह स्वागतयोग्य है.’