सेना में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच अब मेजर जनरल स्तर के अधिकारी करेंगे. इस तरह के मामलों की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो, इस मक़सद से एक अलग अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. वे सीधे सेना प्रमुख को रिपोर्ट करेंगे. इसी तरह मानवाधिकारों के हनन के मामलों की जांच के लिए भी इसी स्तर के अधिकारी की नियुक्ति होगी. वे भी सीधे सेना प्रमुख से संबद्ध रहेंगे.

ख़बरों के मुताबिक सेना में सुधार और पुनर्गठन प्रक्रिया के पहले चरण को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंज़ूरी दे दी है. यह पूरी योजना सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने तैयार की है. इसके तहत दिल्ली में सेना मुख्यालय और रक्षा मंत्रालय में पदस्थ 20 फ़ीसदी अफ़सराें को अब बारी-बारी से मैदानी पदस्थापना दी जाएगी. सीमाओं पर तैनात किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में दिल्ली में पदस्थ 229 अधिकारी सीमा पर तैनाती के लिए चयनित किए गए हैं.

सेना में अब तीसरे उपप्रमुख की नियुक्ति की जाएगी. वे रणनीति-योजना का काम देखेंगे. सेना की ख़ुफ़िया, सूचना तंत्र संबंधी युद्ध (इन्फॉरमेशन वारफेयर) और अभियान इकाईयां उनके अधीन रहेंगी. साइबर युद्ध से जुड़ी चुनौती का मामला भी तीसरे उपसेना प्रमुख के अधीन होगा. अभी तक सेना में दो उपप्रमुख होते हैं. इनमें में एक योजना और तंत्र (प्लानिंग तथा सिस्टम्स) संबंधी ज़िम्मेदारी संभालते हैं. जबकि दूसरे सूचना तंत्र और प्रशिक्षण (इन्फॉरमेशन तथा ट्रेनिंग) के मसले देखते हैं.

इसके अलावा पहले चरण की सुधार प्रक्रिया में ही राष्ट्रीय राइफल्स के महानिदेशक का पद ख़त्म हो रहा है. अब यह इकाई सेना की ऊधमपुर स्थित उत्तरी कमान से संबद्ध की जा रही है. यहां इसकी ज़िम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल के बजाय अब मेजर जनरल स्तर के अधिकारी संभालेंगे. उपसेना प्रमुख प्लानिंग तथा सिस्टम्स को अब उपसेना प्रमुख- कैपेबिलिटी डेवलपमेंट (क्षमता विकास) कहा जाएगा. सेना के आधुनिकीकरण, राजस्व वसूली आदि से जुड़े काम भी उन्हीं के जिम्मे होंगे.