जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह भाजपा के साथ दोबारा गठजोड़ करने के अपनी पार्टी के अध्यक्ष नीतीश कुमार के तरीके से सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि राजद के साथ महागठबंधन से निकलने के बाद भाजपा नेतृत्व वाले राजग में शामिल होने के लिये बिहार के मुख्यमंत्री को आदर्श रूप से नए सिरे से जनादेश हासिल करना चाहिये था.

किशोर ने एक साक्षात्कार में कहा कि महागठबंधन से जुलाई 2017 में अलग होने का नीतीश का फैसला सही था या नहीं, इसे मापने का कोई पैमाना नहीं है. किशोर ने आगे कहा, ‘बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए मेरा मानना है कि यह सही था. लेकिन जो तरीका अपनाया गया उससे मैं सहमत नहीं हूं. मेरी राय है कि भाजपा नीत गठबंधन में लौटने का फैसला करने पर उन्हें नया जनादेश हासिल करना चाहिये था.’

किशोर के बयान पर राजद विधायक और पार्टी की बिहार इकाई के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा, ‘जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का बयान हमारे आरोपों को स्वीकार करने के समान है. नये सिरे से जनादेश मांगे बिना राजग में चले जाने का कदम महागठबंधन की पीठ में छुरा घोंपने के समान है.’ वहीं, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ‘किशोर जनादेश लेने पर ‘प्रवचन’ दे रहे हैं. उनका ज्ञान तब कहां था जब पार्टी ने भाजपा के साथ गठजोड़ करने का फैसला किया. वह खुद जदयू में औपचारिक रूप से उस घटनाक्रम के बाद शामिल हुए, जिसके बारे में वह अब सवाल उठा रहे हैं.’