उत्तर प्रदेश में पहले जो संकेत मिल रहे थे उससे लगने लगा था कि शायद राज्य में भारतीय जनता पार्टी के दो प्रमुख सहयोगी दल- एसबीएसपी (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) और अपना दल- उसका साथ छोड़ सकते हैं. लेकिन भाजपा ने लोक सभा चुनाव की आचार संहिता लगने से चंद घंटों पहले ऐसा दांव चला कि अब ये दोनों पार्टियां भाजपा के साथ चुनाव लड़ने की बातें करने लगी हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार बीते रविवार को जब लोक सभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा होने वाली थी उससे कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने राज्य के विभिन्न निगम-मंडलों के प्रमुखों की नियुक्तियों का आदेश जारी कर दिया. इससे कुल 72 नेताओं का उपकृत किया गया. इनमें 15 नेता सहयोगी दलों के शामिल हैं. इस फैसले के बाद एसबीएसपी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर कहते हैं, ‘भाजपा ने हमारी तरफ़ ईमानदारी से क़दम बढ़ाया है. निश्चित रूप से अब हम उसकी तरफ़ दो क़दम चलेंगे. हम लोक सभा चुनाव भी साथ मिलकर लड़ेंगे.’ इसी तरह अपना दल के नेता अरविंद शर्मा कहते हैं, ‘हम भाजपा के रवैये से पूरी तरह संतुष्ट हैं.’

यहां बताते चलें कि भाजपा ने 2014 का लोक सभा चुनाव अपना दल के साथ लड़ा था. दोनों पार्टियों ने राज्य की 80 में 73 सीटें (भाजपा-71, अपना दल-2) जीती थीं. इसी तरह 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एसबीएसपी से भी भाजपा ने हाथ मिलाया और तीन चौथाई बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाई. लेकिन बीते कुछ समय से दोनों दल भाजपा के रवैये से नाराज़ चल रहे थे. इनमें अपना दल का कुर्मी समुदाय में अच्छा प्रभाव है. जबकि एसबीएसपी का राजभर समुदाय में. दोनों समुदाय अति-पिछड़ा वर्ग में आते हैं.