बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने साफ किया है कि इस लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ कोई गठजोड़ नहीं करेगी. खबरों के मुताबिक बसपा सुप्रीमो ने यह बात एक बयान जारी करके कही है. उनका यह भी कहना है, ‘उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में उनकी पार्टी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठजोड़ किया है. दोनों पार्टियों के बीच हुआ यह पहला और बिल्कुल सही गठजोड़ है. इसमें सामाजिक बदलाव लाने के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनाव में शिकस्त देने की ताकत भी है.’

उनके इस बयान में आगे कहा गया है, ‘आगामी आम चुनाव के मद्देनजर कई राजनीतिक दल बसपा के साथ गठजोड़ करने के इच्छुक हैं. लेकिन पार्टी ने चुनावी फायदे के लिए ऐसा कोई भी काम न करने का फैसला किया है जो बसपा के हित में नहीं हो.’

मायावती के इस बयान को बीते साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों के साथ भी जोड़कर देखा जा रहा है. तब बसपा ने इन तीनों राज्यों में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी. लेकिन दोनों पार्टियों के बीच चुनावी गठबंधन नहीं हो पाया था. मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियों के एक साथ नहीं आ पाने के लिए मायावती ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार ठहराया था. इसके अलावा तब उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के लिए ‘नागनाथ और सांपनाथ’ शब्दों का इस्तेमाल भी किया था.

इधर, आगामी आम चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने पहले ही गठबंधन की घोषणा कर दी थी. इसके तहत सपा राज्य की 37 तो बसपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इस गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) भी शामिल है जिसे तीन सीटें दी गई है. इसके साथ ही इस गठबंधन ने कांग्रेस की पारंपरिक अमेठी और रायबरेली सीट पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारने की घोषणा भी की है. वहीं मध्य प्रदेश में सपा तीन तो बसपा शेष 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उत्तराखंड की पांच सीटों में से एक पर सपा तो बाकी चार पर बसपा अपने उम्मीदवार उतारेगी.