इस बार के लाेक सभा चुनाव में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभाने वाला है. उस पर चलाए जाने वाले अभियानों से चार से पांच फ़ीसदी वोट इधर-उधर हो सकते हैं. सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ टीवी मोहनदास पई ने यह निष्कर्ष निकाला है. सूचना-तकनीक के क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इन्फोसिस में मोहनदास पई मुख्य वित्तीय अधिकारी रह चुके हैं.

मोहनदास पई के मुताबिक, ‘पहली बार वोट देने जा रहे युवा मतदाताओं के लिए सोशल मीडिया ही सूचना का पहला जरिया है. इससे वे बहुत ज़्यादा प्रभावित होते हैं. ये ऐसा वर्ग है जो टीवी नहीं देखता. अख़बार नहीं पढ़ता. बल्कि यूट्यूब पर जाता है. सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाकर सूचनाएं हासिल करता है. ऐसे मतदाताओं में 40-50 फ़ीसदी सोशल मीडिया पर चलने वाले अभियानों में या तो सक्रिय रूप से शामिल हैं या उनसे प्रभावित हैं. ज़ाहिर तौर पर ये चुनाव को भी उसी हिसाब से प्रभावित करेंगे.’

मोहनदास पई कहते हैं, ‘इस नई मतदाता पीढ़ी के हिसाब से राजनीतिक दलों को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी. बदलनी चाहिए. उन्हें देखना होगा कि ये मतदाता क्या चाहते हैं. किन चीजों से प्रभावित होते हैं. क्या पसंद करते हैं. किस तरह की चीजों से भावनात्मक तौर पर जुड़ते हैं. उसी हिसाब से राजनीतक दल अपने अभियान का स्वरूप तय करें. उनके लिए ऐसा संदेश दें जो सकारात्मक हो. जो भविष्य के प्रति आशा का संचार करता हो. जो इस वर्ग की रुचि का हो. तभी इस वर्ग को प्रभावित किया जा सकेगा.’