लोकसभा चुनाव-2019 की तारीख़ों के ऐलान के बाद देश का राजनीतिक माहौल हर गुजरते दिन के साथ गरमाता जा रहा है. 17वीं लोकसभा के लिए होने जा रहा यह चुनाव कई मायनों में ख़ास है. पिछली बार देश के कुल मतदाताओं की संख्या 80 करोड़ से ज़्यादा थी जो इस बार 90 करोड़ हो गई है. चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि इस बार आठ करोड़ 43 लाख नए मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इनमें डेढ़ करोड़ वोटर ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 से 19 साल के बीच है और वे पहली बार आम चुनाव में मतदान करेंगे. इनके अलावा, चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए चुनाव आयोग ने ऐसे कई नए कदम उठाए हैं जो इस लोकसभा चुनाव को खास बनाते हैं.

सौ प्रतिशत वीवीपैट

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद विपक्षी दलों की ओर से यह मांग ज़ोर पकड़ने लगी थी कि 2019 का आम चुनाव ईवीएम मशीनों से नहीं बल्कि बैलट पेपर के ज़रिये कराया जाए. लेकिन चुनाव आयोग इस बात पर क़ायम रहा कि चुनाव ईवीएम मशीनों से ही होंगे. इस दौरान बीच-बीच में हर ओर से यह मांग भी की जाती रही कि अगर चुनाव ईवीएम से होने हैं तो चुनाव आयोग को हरेक पोलिंग बूथ पर वीवीपैट मशीनें लगानी चाहिए ताकि हरेक मतदाता के वोट की गिनती सुनिश्चित हो सके. इस बार यह होने जा रहा है. चुनाव आयोग ने हरेक मतदान को रिकॉर्ड करने के लिए सभी दस लाख बूथों पर वीवीपैट मशीन की व्यवस्था की है.

प्रत्याशी पांच सालों का आय विवरण और तीन बार आपराधिक मामलों की जानकारी देंगे

चुनाव प्रत्याशियों को इस बार नामांकन भरते हुए हलफ़नामे में अपनी पांच सालों की आय के ब्यौरे देने होंगे. साथ ही, चुनाव प्रचार अभियान के दौरान प्रत्याशियों को अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी कम से कम तीन बार ऑडियो-वीडियो या अखबार के जरिये सार्वजनिक करनी होगी. आयोग ने इस संबंध में अक्टूबर, 2018 में निर्देश जारी किए थे. लेकिन दिसंबर में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में ये लागू नहीं हो सके थे. अब आम चुनाव के लिए यह नियम अनिवार्य कर दिया गया है.

ईवीएम मशीन पर प्रत्याशी की तस्वीर, जीपीएस ट्रैकिंग

ईवीएम मशीनों पर अब तक प्रत्याशियों के नाम और उनके दलों के चुनाव चिह्न होते थे. इस बार चुनाव आयोग ने व्यवस्था की है कि हरेक मशीन के हर बटन के आगे प्रत्याशी की तस्वीर भी हो, ताकि मतदाता उसे देख कर तस्दीक कर सके. इसके अलावा ईवीएम मशीनों की निगरानी के लिए चुनाव आयोग जीपीएस ट्रैकिंग की मदद लेगा. आयोग ने वीवीपैट मशीनों की भी जीपीएस ट्रैकिंग की व्यवस्था की है. इसके लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं.

एप के ज़रिये सीधे चुनाव आयोग से शिकायत करने की सुविधा

आचार संहिता और चुनाव संबंधी अन्य नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने नागरिकों को सी-विजिल मोबाइल एप की सुविधा दी है. इसकी मदद से नागरिक आचार संहिता के उल्लंघन की गतिविधियों की तस्वीर लेकर या वीडियो बनाकर सीधे आयोग को भेज सकते हैं. आयोग द्वारा तैनात किए गए फ़्लाइंग स्क्वॉड कुछ ही देर में वहां पहुंच कर कार्रवाई करेंगे.

सोशल मीडिया से सहयोग

लोकसभा चुनाव-2019 को जितना हो सके फ़र्ज़ी ख़बरों से दूर रखने और चुनावी माहौल को नियंत्रित व सुगम बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग फ़ेसबुक, ट्विटर और वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों के साथ काम करने जा रहा है. इनकी मदद से आयोग राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों के कैंपेनों पर भी नज़र रखेगा. बता दें कि इस बार प्रत्याशियों को नामांकन भरते समय हलफ़नामे में अपने सोशल मीडिया अकाउंटों की भी जानकारी देनी होगी. चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के दुरुपयोग और फ़र्ज़ी ख़बरों पर रोक लगाने के मक़सद से आयोग ने लोकसभा चुनावों के लिए पहली बार यह पहल की है.