लोकप्रिय गीतकार जावेद अख्तर ने रमजान में लोकसभा चुनाव के मतदान की तारीखें पड़ने से जुड़े विवाद को अस्वीकार्य बताया है. मंगलवार को एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘रमजान और चुनाव से जुड़ी यह पूरी बहस अस्वीकार्य है. मेरे लिए धर्मनिरपेक्षता का यह विकृत संस्करण घृणास्पद और असहनीय है. चुनाव आयोग को इस पर जरा भी ध्यान नहीं देना चाहिए.’

चुनाव आयोग ने बीते रविवार को लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की है. इनके मुताबिक 2019 का आम चुनाव सात चरणों में कराया जाएगा और इसके तहत पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल और आखिरी चरण का 19 मई को होगा. चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे.

रमजान का महीना पांच मई से चार जून तक है. यही वजह है कि कुछ राजनीतिक पार्टियों और नेताओं ने इस दौरान चुनाव को लेकर सवाल खड़े किए थे. पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) ने रविवार को ही कहा था कि रमजान और गर्मी के मौसम के चलते चुनाव के दौरान लोगों को दिक्कत होगी. कोलकाता के मेयर और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता फिरहाद हाकिम का यह भी कहना था, ‘केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया है ताकि यहां का अल्पसंख्यक तबका रमजान के रोजों के चलते बड़ी संख्या में मतदान के लिए बाहर न निकले.’ समाजवादी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अबु आजमी ने भी हाकिम की बात का समर्थन किया था और कहा था कि रमजान के महीने में बहुत कम मुसलमान मतदान करेंगे.

हालांकि दूसरी तरफ ऑल इंडिया मजसिल-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विवाद को बेमतलब बताया था. उन्होंने कहा था, ‘रमजान के दौरान मुसलमान रोजे तो रखेंगे ही, लेकिन मैं समझता हूं कि उस महीने में ज्यादा मतदान होगा क्योंकि तब लोग अपने दुनियावी कामों से दूर होंगे.’ इसके अलावा ओवैसी ने राजनीतिक दलों से चुनाव और मतदान को लेकर मुस्लिम समुदाय और रमजान का इस्तेमाल नहीं करने की अपील भी की थी.