लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है. पीटीआई के मुताबिक चीन में हाल में हुए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के मुताबिक यह शोध ‘चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज फुवई हॉस्पिटल’ और अमेरिका स्थित एमरॉय विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने साथ मिलकर किया है. इस शोध में 11 साल तक पीएम 2.5 के संपर्क में रहने वाले 88,000 से अधिक चीनी वयस्कों को शामिल किया गया था. इनसे मिले आंकड़ों के आधार पर मधुमेह और प्रदूषण के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया. शोध के नतीजों से पता चला कि लंबे समय तक पीएम 2.5 के 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक बढ़ने से मधुमेह का खतरा 15.7 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

शिन्हुआ की खबर में अध्ययन का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि यह अध्ययन विकासशील देशों के लिए काफी महत्व रखता है क्योंकि इन देशों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. खासतौर पर भारत और चीन जैसे देशों में जहां पिछले कुछ सालों में पीएम 2.5 का स्तर काफी अधिक पाया गया है. लेकिन, इसके बावजूद इन देशों में वायु प्रदूषण और मधुमेह के बीच के संबंध के बारे में जानकारी कम ही सामने आई है.

पीएम 2.5 या सूक्ष्म कण वायु प्रदूषक होते हैं जिनके बढ़ने पर लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है. पीएम 2.5 कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि इससे दृश्यता कम हो जाती है.

मधुमेह से दुनियाभर में काफी आर्थिक और स्वास्थ्य बोझ बढ़ता है. दुनियाभर में चीन में मधुमेह के सबसे अधिक मामले हैं. दिसंबर 2017 में आयी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कुल 11.40 करोड़ मधुमेह रोगी हैं, जबकि भारत 7.2 करोड़ रोगियों के साथ दूसरे नंबर पर है. मधुमेह के करीब तीन करोड़ पीड़ित अमेरिका में हैं.