नौ अक्टूबर, 1910 को न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार के रविवारीय संस्करण की एक प्रमुख हेडलाइन थी: ‘एक गंवार जो सम्मोहन की अवस्था में डॉक्टर बनकर लोगों के इलाज करने का दावा करता है. इस खबर में कहा गया था - चिकित्सा जगत इस बात से हैरान है कि होपकिंसविले शहर के एडगर केसी को मेडिकल विज्ञान की तनिक भी जानकारी नहीं है फिर भी वह दावा करता है कि वह अवचेतन की अवस्था में जाकर मरीज़ों की असाध्य बीमारियों के इलाज बता सकता है. वह यह भी दावा करता है कि उसके पास कुछ ईश्वरीय शक्तियां हैं जिनकी मदद से वह ऐसा कर पाता है.

इस ख़बर ने पूरी दुनिया का ध्यान कमर्शियल फ़ोटोग्राफी करके गुज़ारा करने वाले एडगर केसी की ओर खींच लिया. वे रातों-रात मशहूर हो गए. एडगर केसी की शोहरत का आलम यह था कि उनके चाहने वाले उन्हें ‘सोता हुआ देवदूत’ कहते थे. कुछ की नज़र में वे महान भविष्यवेत्ताओं की श्रेणी में आते हैं. एडगर केसी अपने बारे में कहते थे, ‘जब मैं जागा हुआ होता हूं तो दुनिया का सबसे मूर्ख व्यक्ति होता हूं.’

इसमें कोई दो राय नहीं कि 43 साल तथाकथित अलौकिक शक्तियों द्वारा लोगों की बीमारियों का पता लगाने के दावे की पुष्टि के लिए करीब 9000 रोगियों की रिपोर्ट उनके द्वारा स्थापित ‘एसोसिएशन ऑफ़ रिसर्च एंड एनलाइटएनमेंट’ संस्था के रिकॉर्ड खाते में दर्ज़ है. वहीं दूसरी तरफ, तकरीबन 14 हजार लोगों के भविष्य का हाल बताने वाले एडगर केसी को पिछली सदी के महानतम भविष्यवेत्ताओं में भी शुमार किया जाता है. उन्हें ‘न्यू ऐज’ की शुरुआत करने का श्रेय भी दिया जाता है. यह वह अभियान है जिसमें प्रकृति का संबंध आत्मा और शरीर से होने की बात कही जाती है. कुछ जानकारों की नज़र में ‘न्यू एज’ हिंदू धर्म के अध्यात्म का दूसरा रूप है.

एडगर केसी का व्यक्तित्व बेहद साधारण सरल और आडंबर रहित था. 18 मार्च, 1877 को होप्किंसविले, अमेरिका में पैदा हुए एडगर बचपन में मंदबुद्धि कहे जाते थे. क़िस्सा है कि जब वे नौ साल के थे तो स्कूल में ‘केबिन’ शब्द को कई प्रयास के बाद भी न बोल पाए. उस दिन एडगर के पिता भी पूरी शाम इसी प्रयास में हार गए और उन्होंने एडगर को आधे घंटे के लिए अकेला छोड़ दिया. जब पिता वापस आये तो उन्हें ये जानकार हैरत हुई कि एडगर को किताब का हर पृष्ठ याद था! इस वाकये को याद करके एडगर ने बताया था कि उस शाम को जब व आंखें बंद करके लेटे हुए थे एक आवाज़ ने उनसे कहा कि व सो जायें और सब ठीक हो जायेगा.

नीम बेहोशी में जाकर लोगों का इलाज करना

व अवचेतन की स्थिति में जाकर इलाज करने से जुड़ा हुआ एक क़िस्सा है. बतात हैं कि एक दफा खेलते वक़्त उनकी कमर में बेसबॉल के बल्ले से चोट लग गई. उन्हें बेइंतेहा दर्द उठा. दर्द से कराह रहे एडगर अवचेतन की स्थिति में पंहुच गए और मां से ख़ास किस्म का लेप कमर पर लगाने को कहा. लेप लगते ही वे ठीक हो गए.

इसके बाद एडगर केसी को अंदाज़ा हो गया कि उनके पास लोगों को चंगा करने की शक्ति है, बस उन्हें जागृत अवस्था छोड़कर अवचेतन में जाने की ज़रूरत है. उन्होंने एक सम्मोहन करने वाले व्यक्ति की मदद से अवचेतन अवस्था में जाकर लोगों की बीमारी का पता लगाने और इलाज बताना शुरू कर दिया.

एडकर केसी ने नौवीं के बाद स्कूल छोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने बुकस्टोर में क्लर्की शुरू कर दी. अपनी इस अजीबो-गरीब विधा की वजह से धीरे-धीरे शहर में वे मशहूर हो रहे थे. लोगों को ताज्जुब होता था कि कोई अनपढ़ व्यक्ति अवचेतन में जटिल बीमारियों का इलाज कैसे बता सकता है. वैज्ञानिक और डॉक्टरों की टीम उनकी काबिलियत का परीक्षण करने आई. उन्हें कमरे में लिटाया गया और जब वे ट्रांस में चले गए तो उनकी पत्नी ने डॉक्टरों के सामने मरीज़ों द्वारा भेजे गए ख़त पढ़ने शुरू किये. एडकर कसी ने अवचेतन की अवस्था में ही बीमारी का वर्णन सुनकर ख़त भेजने वाले की बीमारी बताई. डॉक्टरों को हैरत हुई कि महज़ बीमारी के लक्षण सुनकर केसी ने ख़त भेजने वाले रोगी को मधुमेह यानी डायबिटीज का मरीज बताा. उसी अवस्था में रहकर उन्होंने कहा कि रोगी अगर इज़रायल में उगने वाली चुकंदर खायेगा तो उसे लाभ होगा. कुछ शोधों में पाया गया है कि चुकंदर खाने से इन्सुलिन काबू में रखता है.

दरअसल, एडगर केसी को होलिस्टिक चिकित्सा पद्धति के संवर्धन के लिए भी जाना जाता है. यह एक ऐसी पद्धति है जिसमें मरीज़ को विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों द्वारा ठीक किया जाता है.

भविष्यवाणियां जो सच साबित हुईं

एडगर केसी बड़े भविष्यवेत्ता भी माने जाते हैं. 1929 में एक शेयर दलाल उनसे मिला. केसी ने उसे तमाम शेयर बेचने की सलाह दी और साथ में यह भी कहा कि स्टॉक मार्केट में मंदी आने की सम्भावना है जो लंबी चल सकती है. इससे शेयर बाज़ार में हाहाकार मचने की भी आशंका उन्होंने बतायी. उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई. 1929 में विश्व को सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा था. उस दलाल ने शायद उनकी बात नहीं मानी और उसे नुकसान हुआ. बताते हैं कि केसी ने दोनों विश्व युद्धों की भी सटीक भविष्यवाणियां की थीं.

एडगर केसी ने सोवियत रूस के विघटन की पूर्व में ही जानकारी दे थी. उन्होंने कहा ‘जहां भाई भाई के लिए काम कर रहा था, यानी समाजवादी व्यवस्था, उसी ज़मीन से फिर कोई ख़बर आने वाली है.’ 1991 में सोवियत संघ टूट गया और समाजवाद की जगह पूंजीवादी व्यवस्था कायम हो गई.

डेविड वेलचेंक्सी, एमी वैलिस और इर्विग वैलिस अपनी किताब ‘बुक ऑफ़ प्रेडिक्शन्स’ में लिखते हैं कि एडगर केसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंक्लिन डी रूज़वेल्ट और जॉन कैनेडी की मृत्यु की सही-सही भविष्यवाणी की थी. भारत और इज़रायल के आज़ाद होने की उनकी भविष्यवाणी का भी इस किताब में ज़िक्र है. कई और बातें जैसे दुनिया भर में लोकतंत्र की साम्यवाद पर विजय, जापान में एक बड़े तूफ़ान, कैलिफोर्निया में भूकंप और फ़िलीपींस में समुद्री तूफ़ान की सटीक भविष्यवाणियां भी उनके नाम दर्ज़ की जाती हैं.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक अखबार ने एडगर केसी पर एक लेख छापा था जिसका शीर्षक था- ‘वर्जीनिया बीच का चमत्कारी इंसान’. इसमें ज़िक्र था कि एडगर केसी भविष्य और भूतकाल दोनों ही पढ़ते हैं. इसके बाद तो जैसे उनके घर पर चिट्ठियों का अंबार लग गया जिनमें अमेरिकी परिवार जंग में लापता हुए अपने सैनिक परिजनों के बारे में मालूम करने का आग्रह करते थे. इस काम का उन पर इतना अधिक बोझ पड़ा कि वे बीमार रहने लगे.

जो पूर्वानुमान ग़लत निकले

उनके कई पूर्वानुमान ग़लत भी निकले. उनमें एक यह भी था कि 1999 में दुनिया ख़त्म हो जाएगी. और भी कई लोगों ने यह बात कही थी. मिसाल के तौर पर चार्ल्स बेर्लित्ज़ की ‘डूम्सडे 1999’ एक बेहद चर्चित किताब थी जो 31 दिसंबर, 1999 को दुनिया के ख़त्म होने का एलान कर रही थी. पर ऐसा नहीं हुआ. एडगर केसी के कई और पूर्वानुमान भी सच साबित नहीं हुए हैं. जैसे कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि कैलीफ़ोर्निया प्रशांत महासागर में डूब जायेगा. चूंकि वे मशहूर थे और एक भयवाह घटना की आशंका कर रहे थे तो 1960 के दशक के भविष्यवेत्ता इसके होने की संभावना तलाशने लगे. उन्होंने पूर्वानुमान लगाया कि अप्रैल 1969 में ऐसा हो सकता है. इससे शहर में अफ़रा-तफ़री मच गई और कई लोगों ने शहर छोड़ दिया.इसी प्रकार केसी ने लास एंजलिस, सैन फ़्रैंसिस्को और न्यूयॉर्क के तबाह होने की भी घोषणा की थी, पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई.एलियंस और काल्पनिक महाद्वीप अटलांटिस में यकीन करने पर एडगर केसी मज़ाक के पात्र भी बने. उनके समर्थक नकी भविष्यवाणियों में तीसरे विश्वयुद्ध की भी संभावना तलाशते हैं.

पुनर्जन्म में विश्वास

एडगर केसी का पुनर्जन्म में विश्वास था. ‘बुक ऑफ़ प्रेडिक्शन्स’ में लेखक लिखते हैं कि ख़ुद के बारे में एडगर केसी का मानना था कि वे 2100 सदी में नेब्रास्का में पुर्नजन्म लेंगे. तीन जनवरी को उनकी मृत्यु हुई और कहा जाता है कि इससे तीन दिन पहले ही उन्होंने अपनी मृत्यु की घोषणा कर दी थी.

एडगर केसी के नाम पर आज अमेरिका में कई मेडिकल संस्थान चलाये जाते हैं. हालांकि चिकित्सा जगत ने उन्हें नीम हकीम से ज़्यादा कुछ नहीं माना पर उनके समर्थकों में वूड्र विल्सन के अलावा महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन का नाम सबसे मज़बूती से लिया जाता है.