आईसीआईसी बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर ने कहा है कि उन्हें अपने पति दीपक कोचर के वीडियोकॉन समूह के प्रबंध निदेशक वेणुगोपाल धूत के साथ हुए समझौतों की जानकारी नहीं थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ के चंदा ने कहा कि उन्होंने बैंक से संबंधित काम को लेकर अपने पति से कोई बात नहीं की थी, इसलिए वीडियोकॉन को लोन देने के बदले किसी तरह का लाभ लेने का सवाल ही नहीं उठता.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक ईडी ने वीडियोकॉन समूह द्वारा दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर को 64 करोड़ रुपये का लोन दिए जाने को लेकर चंदा कोचर से सवाल किए थे. इससे ठीक एक दिन पहले आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन समूह को 300 करोड़ रुपये बतौर लोन दिए थे. बता दें कि सीबीआई ने इसी 64 करोड़ रुपये की रकम को लेकर चंदा और दीपक कोचर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने वीडियोकॉन समूह को ऋण देने के बदले यह रकम बतौर रिश्वत ली थी.

जांचकर्ताओं को यह भी पता चला है कि वेणुगोपाल ने मॉरीशस से भी दीपक कोचर की कंपनी को एक भुगतान किया था. इस बारे में मॉरीशस की सरकार को एक न्यायिक पत्र भेजा गया है जिसमें इस भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी गई है. वहीं, एक सूत्र के मुताबिक पूछताछ के दौरान बैंक की पूर्व सीईओ ने बताया कि जून 2009 से अक्टूबर 2011 के बीच वीडियोकॉन की कंपनियों को 1,875 करोड़ रुपये के लोन दिए गए थे. चंदा के मुताबिक बैंक की ऋणों को स्वीकृति देने वाली समिति ने कंपनी की अच्छी तरह से जांच-परख करने के बाद योग्यता के आधार पर इन ऋणों को मंजूरी दी थी.

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ईडी के अधिकारियों ने चंदा कोचर, दीपक कोचर और वेणुगोपाल से मुंबई में पूछताछ की थी. सीबीआई और ईडी इस मामले से जुड़े ईमेल खंगाल रहे हैं ताकि इस घोटाले में चंदा कोचर की भूमिका को साबित किया जा सके.