भारतीय जनता पार्टी अपने गठबंधन के सहयोगी दलों को एक-एक कर मनाने में सफल हो रही है. बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के बाद पूर्वोत्तर में भी उसे इस काम में सफलता मिली है. ख़बरों के मुताबिक पूर्वोत्तर के राज्यों की मौज़ूदा सभी सहयोगी पार्टियां अब भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए राज़ी हो गई हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने बीते दिनों दीमापुर और गुवाहाटी में गठबंधन के सहयोगियों के साथ कई बैठकें कीं. इन बैठकों में असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की भाजपा सरकारों के प्रमुख मौज़ूद थे. साथ ही नगालैंड, मेघालय की गठबंधन सरकारों के प्रमुख भी. इसके अलावा भाजपा के नेतृत्व वाले पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) के संयोजक और असम के वरिष्ठ मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी बैठकों में शामिल थे.

आश्चर्यजनक रूप से इन बैठकों में से कुछ में बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौज़ूद रहे. जबकि ये दल कुछ समय पहले एनईडीए से अलग हो गए थे. बताया जाता है कि इन बैठकों में सभी दलों के बीच भाजपा के नेतृत्व में ही लोक सभा चुनाव में उतरने पर सहमति बन गई है. राम माधव ने इस सिलसिले में ट्वीट भी किया, ‘पूर्वोत्तर के सभी दल भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हम यहां 25 में से 22 सीटें जीतेंगे.’

ख़बर की मानें तो सिक्किम में मुख्य विपक्षी पार्टी एसकेएम (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा) और त्रिपुरा में भाजपाई सरकार की साथी आईपीएफटी (इंडीज़िनस पीपुल्स फ्रंट) भी भाजपा के साथ ही चुनाव लड़ेगी. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्टी के खाते में कितनी सीटें आई हैं. लेकिन सूत्रों के हवाले से इतना ज़रूर सामने आया है कि भाजपा असम की 14 में से 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. बाकी सीटें एजीपी और बीपीएफ को दी जा सकती हैं.

ग़ौरतलब है कि पूर्वोत्तर में असम ही सबसे ज़्यादा सीटों वाला राज्य है. उसके अलावा मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश में दो-दो तथा मिज़ाेरम, नगालैंड, सिक्किम में एक-एक लोक सभा सीट है. ग़ौर करने की बात ये भी है कि पूर्वोत्तर में भाजपा के तमाम सहयोगी दल इस बात से असहज थे कि केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून पारित कराने पर जोर दे रही है. हालांकि अब चुनाव काे ध्यान में रखते हुए इस मसले को कुछ समय के लिए किनारे रख दिया गया है.