केंद्र सरकार ने रफाल सौदे से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों की चोरी से फोटोकॉपी होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र (हलफनामा) दाखिल किया है. खबरों के मुताबिक बुधवार को दाखिल इस शपथपत्र के जरिये सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि रफाल सौदे से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं के साथ याचिकाकर्ताओं ने कुछ संवेदनशील दस्तावेज लगाए हैं. उसके मुताबिक ये दस्तावेज इस लड़ाकू विमान की युद्धक क्षमताओं से जुड़े हुए हैं और इस तरह इन लोगों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है.

शपथपत्र में आगे कहा गया है कि सरकार की मंजूरी के बिना अनधिकृत रूप से रफाल सौदे के दस्तावेजों को हासिल करने से देश की सार्वभौमिकता और सुरक्षा प्रभावित हुई है. साथ ही इसकी वजह से अन्य देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है. केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि रफाल सौदे की जांच को लेकर समीक्षा के लिए याचिका लगाने वाले यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण आधे-अधूरे दस्तावेजों के आधार पर अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.

सरकार के मुताबिक ये तीनों याचिकाकर्ता रफाल से जुड़े गोपनीय दस्तावजों को लीक करने के दोषी हैं. इन तर्कों के आधार पर सरकार ने शीर्ष अदालत से रफाल सौदे से जुड़ी समीक्षा याचिकाओं को खारिज करने की अपील भी की है. साथ ही अदालत से इस सौदे से जुड़े उन तमाम कागजातों को भी हटवाने की गुजारिश की है जो सुप्रीम कोर्ट में रखे गए हैं. सरकार का यह भी कहना है कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेज कैसे चुराए गए इसकी जांच की जा रही है.

इससे पहले बीते हफ्ते अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने रफाल सौदे से जुड़ी सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत से कुछ गोपनीय दस्तावेजों के चोरी होने की बात कही थी. हालांकि उसके दूसरे दिन अपने अपने उस बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया था. तब उन्होंने कहा था कि मूल दस्तावेज चोरी नहीं हुए हैं बल्कि उन दस्तावेजों की फोटोकॉपी करके उन्हें चुराया गया है.