कांग्रेस पार्टी की दिल्ली इकाई ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) के साथ गठबंधन की संभावना को नकार रही है, लेकिन उसका नेतृत्व इसे लेकर अभी भी गंभीरता दिखा रहा है. एक खबर के मुताबिक कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस गठबंधन को लेकर अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से राय लेने का फैसला किया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि एक संदेश रिकॉर्ड कर उसे हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भेजा गया है. इसमें उनसे पूछा गया है कि क्या कांग्रेस को दिल्ली में ‘आप’ के साथ गठबंधन करना चाहिए. कार्यकर्ता संदेश में दिए गए विकल्पों में से किसी एक को चुन कर अपनी राय रजिस्टर करा सकते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अपने अध्यक्ष राहुल गांधी के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट ‘शक्ति’ के तहत पंजीकृत 52,000 कार्यकर्ताओं से राय लेगी. दिल्ली में कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको ने अखबार से कहा, ‘मेरी दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्षों, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुखों और जिला अध्यक्षों से बातचीत हुई थी. उनकी राय रिकॉर्ड कर ली गई है. अब हम कार्यकर्ताओं की राय ले रहे हैं.’ चाको ने कहा कि पार्टी इसके बाद इस पेचीदा मुद्दे पर फैसला लेगी.

कांग्रेस ने अन्य राज्यों के प्रमुख दलों के साथ गठबंधन किए हैं. लेकिन दिल्ली के मामले में वह अभी भी फैसला नहीं ले पाई है. हाल में राहुल गांधी ने यह कहते हुए इस मुद्दे पर विराम लगा दिया था कि उनकी पार्टी का आप से गठबंधन करने की कोई संभावना नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक पार्टी की दिल्ली इकाई इसके खिलाफ है. लेकिन सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों के शीर्ष उसके बाद भी बातचीत कर रहे थे. इस पर पीसी चाको ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य मोदी को हराना है. इसलिए हम सभी राज्यों में गठबंधन कर रहे हैं. सभी दलों के साथ राजनीतिक व अन्य प्रकार के वैचारिक मतभेद होते हैं. लेकिन हम सब इस बात पर सहमत हैं कि हमें भाजपा को हराना होगा. अगर दिल्ली में गठबंधन होता है तो यह केवल 2019 लोकसभा चुनाव तक सीमित होगा.’

उधर, ‘आप’ का कहना है कि पहले कांग्रेस सिर्फ गठबंधन न करने की वजह ढूंढ रही थी. पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘पहले उन्होंने इस बात से इनकार किया कि (गठबंधन को लेकर) ‘आप’ की तरफ से कोई बातचीत या प्रस्ताव आया है. लेकिन जब उनका भेद खुल गया तो उन्होंने (गठबंधन नहीं करने का) दोष दिल्ली इकाई पर मढ़ दिया. अब वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रही है... एक राजनीतिक पार्टी के रूप में कांग्रेस असल में भाजपा से गठबंधन कर रही है ताकि गैर-भाजपाई वोटों को बांटा जा सके.’