आइंस्टाइन एक क्रांतिकारी वैज्ञानिक ही नहीं, आध्यात्मिक चिंतक भी थे. उनकी सूक्तियां बहुत ही सारगर्भित होती थीं. कुछ उदाहरण :

1. मानव-बुद्धि की सबसे बड़ी खोज क्या है? चक्रवृद्धि ब्याज!

2. मेधावी लोग शायद ही कभी नियमबद्ध होते हैं, नियमबद्ध लोग शायद ही कभी मेधावी.

3. जो न तो चकित-चमत्कृत होता है और न आदरभाव से नतमस्तक, उसकी आत्मा मर चुकी है.

4. विज्ञान धर्म के बिना पंगु होता है, और धर्म विज्ञान के बिना अंधा.

5. ईश्वर को हमारी गणितीय समस्याओं की चिंता नहीं है. उसका जोड़-घटाना अनुभव-सिद्ध होता है.

6. शिक्षा वही है, जो बची रह जाये. जब व्यक्ति वह सब भूल जाये जो उसने स्कूल में पढ़ा था.

7. तर्कबुद्धि आप को अ से ब तक पहुंचाती है. कल्पनाशक्ति हर जगह ले जाती है.

8. हम इस तथ्य से कतरा नहीं सकते कि हमारी हर क्रिया का संपूर्ण पर प्रभाव पड़ता है.

9. यदि ईश्वर ने सृष्टि की रचना की है, तो उसकी मुख्य चिंता निश्चय ही यह नहीं थी कि हम उसे समझ सकें.

10. उसे, जिसके बारे में हमारी सारी गणना ग़लत सिद्ध हो जाती है, हम संयोग कहते हैं.

11. ब्रह्मांड के बारे में सबसे अबूझ बात यह है कि हम उसे बूझ सकते हैं.