मंगलवार, पांच मार्च को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वेबसाइट अचानक बंद हो गई. इसके बाद भाजपा की वेबसाइट का एक स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल का मीम लगाते हुए कुछ अपशब्द लिखे गए थे. कइयों ने दावा किया कि भाजपा की वेबसाइट हैक कर ली गयी है. अगले दिन भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने मीडिया को बताया कि वेबसाइट हैक नहीं हुई है, बल्कि इसमें कुछ ‘तकनीकी खराबी’ आई है, जिसे दुरुस्त किया जा रहा है. तब मालवीय का यह भी कहना था कि इसे कुछ ही देर में शुरू कर दिया जाएगा.

अमित मालवीय के इस बयान के करीब दो हफ्ते बाद भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट शुरू हो गई है. लेकिन जो लोग अक्सर इस पर जाते रहे हैं उन्हें इसे देखना काफी अजीब लग सकता है. जिस तरह का कलेवर इस वेबसाइट का है उससे ऐसा लग रहा है कि इसके बंद होने के बाद जताई गई आशंकाएं सच हैं. हैक होने से पहले वेबसाइट पर विभिन्न नेताओं के कार्यक्रमों से जुड़ी तस्वीरों से लेकर प्रेस विज्ञप्तियों तक सब कुछ बहुत करीने से रखा दिखता था. लेकिन अब इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सिर्फ एक तस्वीर के अलावा एक ही जानकारी और दिख रही है - पार्टी द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए गुरुवार को जारी की गई 185 उम्मीदवारों की सूची.

इससे पहले करीब दो हफ्ते तक भाजपा की वेबसाइट खोलने पर यह संदेश लिखा दिख रहा था, ‘हम जल्द ही वापस लौटेंगे! असुविधा के लिए खेद है. वेबसाइट सुधारने की कोशिश जारी है.’ इतने लंबे समय तक वेबसाइट दुरुस्त न हो पाने के चलते भाजपा विपक्षी पार्टियों के निशाने पर भी आ गई था. तमाम सवाल उठने और किरकिरी होने के बाद भाजपा ने स्वीकार किया था कि उसकी वेबसाइट हैक हुई है. ‘डिजिटल इंडिया समिट’ में केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था, ‘वेबसाइट बीते सप्ताह कुछ मिनटों के लिए हैक हुई थी. साइट एक हफ्ते से ज्यादा समय से मेंटेनेंस मोड में है.’ हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह सही कब तक हो जाएगी.

आम तौर पर देखा जाता है कि कोई वेबसाइट हैक होने के चंद घंटे बाद ही सही काम करने लगती है. बीते पखवाड़े गुजरात कांग्रेस की वेबसाइट भी हैक हुई थी लेकिन कुछ घंटे बाद ही उसे सही कर दिया गया. बीते साल करीब 10 मंत्रालयों की वेबसाइटें हैक हुईं थीं, लेकिन सभी को छह घंटे में दुरुस्त कर दिया गया था. ऐसे में सवाल यह उठ रहा था कि आखिर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली, भारत की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की वेबसाइट को सही होने में इतना समय क्यों लग रहा है. वह भी ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. सत्याग्रह ने इस मसले पर तकनीक के कई जानकारों से बात करके इसे समझने की कोशिश की.

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ आकाश पाण्डेय का सत्याग्रह से बातचीत में कहना था कि इतने समय तक वेबसाइट शुरू न होना, वाकई चौंकाने वाली बात है क्योंकि वेबसाइट दुरुस्त करने में इतना समय नहीं लगता. आकाश के मुताबिक वेबसाइट पर भाजपा के तकनीक विभाग ने अपना नियंत्रण हैक होने वाले दिन ही वापस ले लिया था क्योंकि ‘अंडर मेंटेनेंस’ का जो मैसेज दिख रहा था वह भाजपा के ही सर्वर से आ रहा था.

आकाश ने आगे कहा, ‘लेकिन इसके बावजूद अगर इतने समय तक वेबसाइट बंद है तो साफ़ है कि कोई बड़ी दिक्कत है.’ उन्होंने तीन संभावनाएं जताईं. आकाश के शब्दों में ‘वेबसाइट पर नियंत्रण करने के बाद भी अगर कंटेंट नहीं दिखाया जा रहा है तो इसका मतलब कोई बहुत बड़ी खामी पता चल गई है या फिर सारा डेटा उड़ गया है जिसे रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है.’ आकाश के मुताबिक तीसरी संभावना यह भी है कि वेबसाइट में तकनीक को लंबे समय बाद अपडेट किया जा रहा हो.

नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कम्पनी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर अंकित अग्रवाल ने भी सत्याग्रह से बातचीत में कुछ ऐसी ही संभावना जाहिर की थी. उनका कहना था, ‘सबसे बड़ी संभावना यही लगती है कि हैकर्स ने वेबसाइट का सारा डेटा गायब कर दिया और भाजपा के तकनीक विभाग के पास उसका बैकअप नहीं है.’ अंकित के मुताबिक डेटा रिकवर करने में ही इतना समय लग सकता है. अब वेबसाइट शुरू होने के साथ साफ है कि वेबसाइट पर मौजूद रहे डेटा को रिकवर नहीं किया जा सका है.

जैसा कि आकाश ने कहा, भाजपा के आईटी सेल से जुड़े कुछ सूत्रों का भी यह कहना था कि पार्टी वेबसाइट कई सालों से अपडेट नहीं हुई थी, इस वजह से अब उसे अपडेट किया जा रहा है. इस पर कई लोग सवाल उठाते हुए कहते हैं कि आखिर क्यों भाजपा अपनी प्रमुख वेबसाइट में सुरक्षा को दरकिनार करती रही और वेबसाइट को नयी तकनीक के साथ अपडेट क्यों नहीं किया गया. इसके अलावा साइट को अपडेट करने के लिए पुरानी साइट को बंद करना जरूरी क्यों था? और अगर उसे बंद करना जरूरी था भी तो ऐसा इतने लंबे समय तक करना जरूरी क्यों था? अब सवाल यह है कि अगर इसे अपडेट ही किया जा रहा था तो अब भी यह पूरी तरह से शुरू क्यों नहीं हुई है?

और अगर यह मान लिया जाए कि भाजपा की वेबसाइट की मेंटीनेंस का काम अभी भी चल रहा है तो इसे इतने लंबे समय तक अपडेट न करने जैसी इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती गई? तकनीक के जानकारों के मुताबिक हर वेबसाइट को बनाने वाली कम्पनी पर उसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी होती है. लेकिन कुछ कंपनियां इस पर उतना ध्यान नहीं देतीं. हालांकि अधिकांश कंपनियां मेंटेनेंस का पैसा न मिलने पर ऐसा करती हैं. लेकिन भारतीय जनता पार्टी की वेबसाइट के मामले में किसी सॉफ्टवेयर कंपनी द्वारा इतनी गंभीर लापरवाही बरता जाना संभव नहीं लगता.

ऐसे में सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ आकाश पाण्डेय एक और बात बताते हैं. वे कहते हैं कि यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि आखिर भाजपा की वेबसाइट किसी नामी कंपनी ने बनाई थी या फिर भाजपा के आईटी सेल के ही कुछ लोगों पर इसकी जिम्मेदारी थी. अगर इसे कोई प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी बनाती तो शायद ऐसा नहीं होता. बड़ी कंपनियां के पास बेहतर इंजीनियर, अपडेटेड फ़ायरवॉल, डेली बैकअप और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सेंटर हैं. ऐसे में अव्वल तो ऐसी समस्या होती नहीं और अगर होती भी तो वेबसाइट इस तरह से बनी होती कि उसे चुटकियों में हल कर लिया जाता.