दवा निर्माण के क्षेत्र में दुनिया की जानी-मानी भारतीय कंपनी रैनबैक्सी के मालिकों- मलविंदर और शिविंदर सिंह पर सुप्रीम कोर्ट ने सख़्त टिप्पणी की है. शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गाेगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने रैनबैक्सी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान इस कंपनी के मालिकों से कहा कि दो सप्ताह में बताइए, 3,500 करोड़ रुपए की रकम कब और कैसे चुकाएंगे.

अदालत ने कहा, ‘दवा निर्माण के क्षेत्र में आप दुनिया में अग्रणी हैं. इसलिए आपके लिए यह अच्छी बात नहीं कि आप इस तरह अदालत में पेश हों. आप अपने वित्तीय और कानूनी सलाहकारों से मशविरा कीजिए. इसके बाद 28 मार्च तक अदालत में वह योजना पेश कीजिए जिसमें बताया जाए कि आप 3,500 करोड़ रुपए कब तक, किस तरह चुका रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि इस बार आप आख़िरी बार अदालत में खड़े होंगे.’ अदालत में सुनवाई के दौरान कंपनी के मालिकों में से एक ने हलफ़नामा देकर कहा कि वे ‘दुनिया से संन्यास ले चुके हैं.’

इस पर भी शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी ही की. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘दीन-दुनिया से संन्यास ले लेना अच्छी बात है लेकिन आपके अपने लिए, हमारे लिए नहीं. आप तो हमें वह योजना बताइए कि आप किस तरह मांगी गई रकम चुकाएंगे. आपको समय चाहिए तो वह भी लीजिए. लेकिन आप अगर इधर-उधर की बातें करेंगे तो आपको परेशानी हो सकती है.’

दरअसल मामला मूल रूप से रैनबैक्सी और जापानी फार्मा कंपनी डायची सैंक्यो के बीच का है. इन दाेनों कंपनियों के बीच एक विवादित मामले का निपटारा करते हुए सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने रैनबैक्सी को आदेश दिया था कि वह डायची सैंक्यो को 3,500 करोड़ रुपए अदा करे. लेकिन रैनबैक्सी ने यह रकम नहीं चुकाई. इसके बाद डायची सैंक्यो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इसमें मांग की है कि रैनबैक्सी को सिंगापुर मध्यस्थता अदालत का आदेश मानने का निर्देश दिया जाए.