अमेरिका में रह रहे गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान का एक केंद्र शासित प्रदेश जो पहले पीओके का हिस्सा था) के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सेंज हसनैन सेरिंग को कथित रूप से बालाकोट हमले में 200 आतंकियों के मारे जाने का पता चल गया है. बुधवार को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया जो कल पूरे दिन भारतीय मीडिया में इस तरह दिखाया गया मानो सच में बालाकोट हवाई हमले में ‘200’ आतंकी मारे गए हैं. कई न्यूज़ चैनलों और वेब मीडिया पोर्टलों की रिपोर्टों में कहा गया कि वे इस वीडियो की पुष्टि नहीं करते, लेकिन इसके साथ ही दावा किया गया, ‘इस वीडियो ने पाकिस्तान के झूठ की पोल खोल दी है.’

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है. इसकी छानबीन के दौरान हमने देखा कि एक तरफ़ भारत और पाकिस्तान के कई लोग इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ मीडिया ‘पुष्टि नहीं करने की’ चतुरता दिखाते हुए यही साबित करने की कोशिश कर रहा है कि यह वीडियो बालाकोट हवाई हमले में मारे गए किसी आतंकी के जनाज़े या शोक कार्यक्रम से संबंधित है. लेकिन क्या सच में ऐसा है?

गिलगित-बाल्टिस्तान के सामाजिक-राजनीतिक अधिकार कार्यकर्ता का ट्वीट
गिलगित-बाल्टिस्तान के सामाजिक-राजनीतिक अधिकार कार्यकर्ता का ट्वीट
ट्वीट में किए गए दावे के आधार पर एक न्यूज चैनल की खबर
ट्वीट में किए गए दावे के आधार पर एक न्यूज चैनल की खबर

सत्याग्रह ने इस बारे में पता लगाने की कोशिश की है. हमारी जांच-पड़ताल से यह साफ हुआ है कि इस वीडियो का भारतीय वायुसेना के बालाकोट हमले से कोई संबंध नहीं है. साथ ही इससे भारतीय मीडिया की संबंधित रिपोर्टों पर भी सवाल खड़े हुए हैं. इस मामले में सबसे पहले ध्यान देने वाली बात है कि वीडियो शेयर करने के बाद ख़ुद सेंज हसनैन सेरिंग ने कहा कि वे इस वीडियो को लेकर आश्वस्त नहीं हैं. ऐसे में पहला सवाल यह बनता है कि जब वीडियो को शेयर करने वाला उसे लेकर आश्वस्त नहीं है तो मीडिया क्यों उस पर यक़ीन कर ख़बर चला रहा है.

ज़ी न्यूज़ की ख़बर का स्क्रीनशॉट
ज़ी न्यूज़ की ख़बर का स्क्रीनशॉट

दूसरी बात ये कि यह वीडियो यूट्यूब पर दो मार्च से देखा जा रहा है. यह कैसे हो गया कि इतना बड़ा दावा खुलेआम सोशल मीडिया पर वायरल है और टीवी न्यूज़रूमों में रडार लेकर बैठा हमारा मीडिया उसे अब देख पाया!

उधर, भारतीय मीडिया के दावे पर पाकिस्तान में यह कहा जा रहा है कि यह वीडियो सीमा पर भारतीय सेना की गोलाबारी में मारे गए किसी पाकिस्तानी सैनिक के अंतिम संस्कार से संबंधित है. लेकिन इस दावे को लेकर भी संदेह है. इसकी वजह यह है कि पाकिस्तानी सेना अपने सैनिकों को उस तरह अंतिम विदाई नहीं देती जैसा इस वीडियो में दिख रहा है. फिर भी, हो सकता है यह वीडियो किसी पाकिस्तानी सैनिक के जनाज़े के समय का हो. लेकिन इतना तय है कि इसका बालाकोट से कोई लेना-देना नहीं है. इस वीडियो का सच बताने से पहले नीचे दी गई तस्वीरों में लाल घेरों में दिख रहे लोगों को ग़ौर से देख लें. आगे की कड़ियां जोड़ने के लिए यह ज़रूरी है.

पहले वायरल वीडियो की बात करते हैं. इसमें पाकिस्तानी सेना के अधिकारी की उस बात को ग़ौर से सुनते हैं जिसके आधार पर ‘200’ आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया है. उसने कहा है : कल 200 बंदे ऊपर गए थे, (लेकिन) इसके नसीब में शहादत लिखी हुई थी. हम लोग (सैनिक) ज़्यादा ऊपर जाते हैं, आते हैं जाते हैं. हमारे नसीब में यह (शहादत) नहीं था.

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यहां दो बातें महत्वपूर्ण हैं. एक तो यह बात (49वें सेकेंड से देखें) सीधे अधिकारी की तरफ़ से कही जाती नहीं दिख रही है. वीडियो देखकर साफ़ पता चल जाता है कि यह एम्बेयिंस है, यानी किसी वीडियो या ऑडियो क्लिप की मुख्य आवाज़ से अलग कोई आवाज़. ऐसा इस वीडियो में दो बार होता है. लेकिन अगर इसे अधिकारी की ही आवाज़ मान लें, तो भी यह कहीं नहीं लगता कि वह 200 आतंकियों के मारे जाने की बात कर रहा है. उसकी बात से यही अंदाज़ा होता है कि वह किसी पहाड़ी पर रोज़ाना आने-जाने वाले लोगों की संख्या का ज़िक्र कर रहा है. उसका मृतक की मृत्यु को ‘नसीब’ बताना यही साबित करता है कि वह 200 नहीं, बल्कि 200 में से एक के मारे जाने की बात कह रहा है.

अब इस घटना से संबंधित दो और वीडियो की बात करते हैं. इसमें भी पाकिस्तानी सेना का वही अधिकारी, जिसके बैच पर ‘फ़ैज़ल’ लिखा है, देखा जा सकता है. एक वीडियो में वह मृतक के परिजनों को दिलासा दे रहा है और मृतक को शहीद बता रहा है. वहीं, एक अन्य वीडियो में वह ‘दुश्मन’ (यानी भारत) के लिए कह रहा है कि उसने उसके आम नागरिकों को निशाना बनाया. ये आम नागरिक पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में रह रहे लोग हैं.

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दरअसल, बालाकोट हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने भारतीय चौकियों को निशाना बनाया था. उसके जवाबी हमले में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की कई पोस्ट और बंकरों को उड़ा दिया था. इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैनिकों के साथ पीओके के कुछ लोग भी निशाना बन गए थे. इस बारे में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें इंटरनेट (सीएनएन की रिपोर्ट) पर उपलब्ध हैं.

इस जांच-पड़ताल से दो बातें साबित होती हैं. एक तो यह कि भारतीय मीडिया ने सावधानी बरते बिना इस वीडियो को ख़बर की तरह चलाया. दूसरी यह भी कि कैसे पाकिस्तान अपने क़ब्ज़े वाले कश्मीर के लोगों को भारत के ख़िलाफ़ भड़काता है और अपनी सेना को उनके ‘रक्षक’ के रूप में पेश करता है. जबकि हक़ीक़त यह है कि पाक सेना की वजह से वे लोग भारतीय गोलाबारी का शिकार होते हैं.

चलते-चलते एक जानकारी और दे दें. पाकिस्तान में पैदा हुए कई लोगों को जबर्दस्ती अन्य देशों में जाना पड़ा है. जैसे तारेक फ़तेह कनाडा के नागरिक हैं और अपना ज्यादातर वक्त भारत में बिताते हैं. इसी तरह बलूचिस्तान में पैदा हुए हसनैन अमेरिका में रह रहे हैं. यह सही है कि ये लोग मानवाधिकार के मुद्दे पर अपनी बेबाक राय की वजह से प्रताड़ित किए गए हैं. इस कारण इनमें अपने ही देश को लेकर ज़बर्दस्त ग़ुस्सा है. इसी ग़ुस्से का शिकार होकर ये जाने-अनजाने फ़र्ज़ी ख़बरें तक शेयर कर देते हैं. हसनैन सेरिंग द्वारा शेयर किया गया वीडियो इसका नया उदाहरण भर है.

(अगर आपके पास सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी कोई जानकारी (ख़बर, तस्वीर या वीडियो) आई है, जिसके सही होने पर आपको संदेह हो तो उसे हमें dushyant@satyagrah.com पर भेज दें. हम उसकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेंगे.)