दूसरी पार्टियों से नेताओं के आयात के मामले में भारतीय जनता पार्टी को गुरुवार के दिन दो बड़ी सफलताएं हाथ लगीं. वह भी केरल और पश्चिम बंगाल जैसे उन राज्यों से जहां उसका जनाधार न के बराबर है. केरल से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टॉम वडक्कन और पश्चिम बंगाल से सत्ताधारी टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के वरिष्ठ नेता व विधायक अर्जुन सिंह ने भाजपा का दामन थामा है.

सभी को लगभग चौंकाने वाला घटनाक्रम टॉम वडक्कन का भाजपा में शामिल होना रहा. टॉम वडक्कन एक समय में यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) अध्यक्ष सोनिया गांधी के निकट सहयोगी हुआ करते थे. वे कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसे पद पर भी रहे. लगभग दो दशक तक वे कांग्रेस के मीडिया विभाग से जुड़े रहे हैं. लेकिन उन्हाेंने अब यह कहते हुए कांग्रेस छोड़ी है कि पार्टी की ओर से देश की सेनाओं पर सवाल उठाने से वे बुरी तरह आहत हुए हैं.

भाजपा कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के हाथों सदस्यता ग्रहण करने के बाद टॉम वडक्कन ने मीडिया से कहा, ‘अगर कोई पार्टी देश की ही ख़िलाफ़त करने लगे तो उसे छोड़ देने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता. मैंने कांग्रेस इसलिए छोड़ी क्योंकि जब पाकिस्तानी आतंकियों ने हमारे देश पर हमला किया तो मेरी पार्टी की प्रतिक्रिया निराशाजनक थी. मुझसे तब और ज़्यादा निराशा हुई जब मेरी पार्टी की ओर से हमारी सेनाओं पर सवाल उठाया गया.’

इसी तरह के एक अन्य घटनाक्रम में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के भटपारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक अर्जुन सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा नेता मुकुल रॉय और कैलाश विजयवर्गीय की मौज़ूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली. उन्हाेंने भी टीएमसी छोड़ने के कमोबेश वही कारण बताए जो टाॅम वडक्कन ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के बताए थे.

हालांकि ख़बरों की मानें तो अर्जुन सिंह बैरकपुर लोक सभा क्षेत्र से टीएमसी का टिकट मांग रहे थे. लेकिन टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इस सीट से मौज़ूदा सांसद दिनेश त्रिवेदी को ही फिर टिकट दे दिया. इससे नाराज़ होकर अर्जुन सिंह ने टीएमसी को अलविदा कह दिया. माना जा रहा है कि अब भाजपा उन्हें बैरकपुर लोक सभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बना सकती है.