आगामी आम चुनाव के मद्देनजर इलेक्ट्रॉनिंक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ छेड़छाड़ न हो सके इसे सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस याचिका में इन दलों ने शीर्ष अदालत से ईवीएम को हैकिंग और छेड़छाड़ से मुक्त करने, साथ ही 50 फीसदी मशीनों में वीवीपैट (वोटिंग पर्ची) निकाले जाने की व्यवस्था किए जाने की अपील की है. एनडीटीवी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर कल सुनवाई करेगा.

इससे पहले साल 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिले भारी बहुमत के बाद कई दलों ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई थी. तब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने आगामी चुनावों को बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिये संपन्न कराने की मांग भी की थी.

बीते दिनों पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक रैली के बाद भी विपक्षी दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे. उसके बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने इस सिलसिले में चुनाव आयुक्त से मुलाकात करके ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की संभावनाओं पर अपनी चिंता भी जताई थी. साथ ही आगामी अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव को मतपत्र के जरिये कराने की मांग की थी.

हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया था. साथ ही यह भी कहा था कि ईवीएम के साथ कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है. आयोग का यह भी कहना था मतपत्र से चुनाव कराना इतिहास में लौटने जैसा होगा.