लोकसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया शुरू होने में अब एक महीना भी नहीं बचा है. ऐसे समय में उत्तर प्रदेश के प्रमुख दल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं. दरअसल, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा करने के दो महीने के अंदर बसपा के कम से कम 15 बड़े नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं. इनमें 11 नेता ऐसे हैं जो बसपा के टिकट पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा कैंप का दायरा बढ़ाने में विपक्ष के अन्य दलों का भी योगदान है. अखबार ने बताया है कि बीते एक महीने में बसपा के साथ सपा, आरएलडी और कांग्रेस से कुल 28 नेता भाजपा में जा चुके हैं. लेकिन इनमें बसपा नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से एक नेता ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र से टिकट पक्का करने के लिए यह कदम उठाया है.

दरअसल, सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश की लड़ाई मुश्किल हो गई है. ऐसे में उसने दूसरे दलों के नेताओं के लिए कहा है कि उसके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. जानकार इसे राज्य में सपा-बसपा गठबंधन के रूप में उभरी चुनौती को खत्म करने की भाजपाई रणनीति के रूप में देखते हैं. इसी के तहत पार्टी ने बसपा के बड़े नेताओं को अपने यहां शामिल किया है. इनमें मंत्री पदों पर रहे नेताओं के अलावा वे नेता भी शामिल हैं जो बसपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं.

इस बारे में जब उत्तर प्रदेश में भाजपा के महासचिव विजय बहादुर पाठक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, ‘हमने नए नेताओं के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं. इससे पार्टी को मिलने वाले मतों में वृद्धि होगी. आने वाले दिनों में और लोग भाजपा में शामिल होंगे.’