उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण पर अमेरिका से हो रही बातचीत की प्रगति से संतुष्ट नहीं है. वह इसे रद्द भी कर सकता है. उत्तर कोरिया के वरिष्ठ राजनयिकों के हवाले से यह ख़बर आई है.

ख़बरों के मुताबिक उत्तर कोरिया की उपविदेश मंत्री चो सन हुई ने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारियों की वज़ह से दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत बिना किसी नतीज़े के ख़त्म हो गई थी. रूसी समाचार एजेंसी तास के साथ बातचीत में चो ने कहा, ‘हम अमेरिका की मांग को किसी रूप में स्वीकार नहीं कर सकते. और जिस तरह से वे (अमेरिकी पक्ष) बातचीत कर रहे हैं, उसे हम आगे भी नहीं बढ़ा सकते.’ उन्हाेंने कहा, ‘अमेरिका गुंडों की तरह बर्ताव कर रहा है. इससे हालात और ख़तरनाक हो सकते हैं.’

चो का यह भी कहना था, ‘अगर अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया को राहत नहीं देता तो हमें मिसाइल और परमाणु परीक्षण रोकने के अपने फ़ैसले पर भी पुनर्विचार करना होगा.’ उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेताओं (डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन) के बीच बातचीत रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही थी. लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा किया. इससे बातचीत बेनतीज़ा ख़त्म हुई.’

ग़ौरतलब है कि उत्तर कोरिया को परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए राज़ी करने के मक़सद से अमेरिका ने बातचीत शुरू की थी. इस मकसद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन के बीच सिंगापुर और वियतनाम की राजधानी हनोई में दो बार बात हुई. लेकिन यह बेनतीज़ा रही क्योंकि उत्तर कोरिया पहले उस पर लगाए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील चाहता है. इसके लिए अमेरिका राज़ी नहीं है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि किम जोंग उन जल्द इस वार्ता के भविष्य के बारे में कोई घोषणा कर सकते हैं.