ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए नरसंहार को लेकर पश्चिमी सरकारों पर ‘इस्लामोफाबिया’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. शुक्रवार को शहर की दो मस्जिदों में हुए हमलों में 49 नमाजियों की मौत हो गई थी. इस पर ईरान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर एक बयान जारी किया गया है. इसमें हसन रूहानी ने कहा कि यह गोलीबारी दर्शाती है कि ‘कुछ पश्चिमी सरकारें दुर्भाग्यवश पश्चिम में इस्लामोफोबिया (इस्लाम से डर) को बढ़ावा दे रही हैं जिसका हम सबको मिलकर मुकाबला करने की आवश्यकता है.’

इस बीच, तुर्की ने इस हमलावर के कई बार वहां आने के संबंध में अपनी जांच शुरू कर दी है. तुर्की के एक अधिकारी ने बिना तारीख बताए कहा कि मामले में गिरफ्तार ऑस्ट्रेलियाई नागरिक कई बार तुर्की आया और लंबे समय तक वहां रहा. पीटीआई के मुताबिक नाम उजागर न करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘हमें लगता है कि संदिग्ध संभवत: अन्य देशों यूरोप, एशिया और अफ्रीका भी गया था. हम संदिग्ध की गतिविधियों और देश में उसके संबंधों का पता लगा रहे हैं.’

उधर, गोलीबारी कर 49 लोगों को मौत के घाट उतारने के आरोपी दक्षिणपंथी हमलावर को आज अदालत में पेश किया गया. ऑस्ट्रेलिया में जन्मा ब्रेंटन टारेंट (28) हाथ में हथकड़ी और कैदियों वाली सफेद रंग की कमीज पहने अदालत में पेश हुआ. न्यायाधीश ने उसके खिलाफ हत्या के आरोप तय किए. उस पर और भी आरोप लगाए जा सकते हैं. खबर के मुताबिक हमलावर ने जमानत की कोई अर्जी नहीं दी है. पांच अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई तक उसे हिरासत में रखा जाएगा.