नितिन गडकरी जी, अब अंतिम तौर पर बता दीजिए कि आप प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं या नहीं?

देखिए, मैं स्पष्ट बात करने वाला आदमी हूं. मुझसे सीधा सवाल पूछिये, मैं सीधा जवाब दूंगा. बाद में गोलमोल तो वो खुद-ब-खुद बन जाएगा. दौड़ से पीएम बनते तो मिल्खा सिंह कब का बन गए होते. बाकी चुनाव में पार्टी के आदेश पर मैं दौड़ रहा हूं. मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि यह प्रधानमंत्री पद की दौड़ है या नहीं.

क्या ऐसा है कि भाजपा की सीटें अगर उम्मीद से कम रहीं और जोड़-तोड़ से सरकार बनानी पड़ी तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आपका नाम बतौर प्रधानमंत्री आगे कर सकता है?

उम्मीद का मैं क्या कर सकता हूं! उम्मीद पर दुनिया कायम है. मैं सच्चा स्वयंसेवक हूं और संघ का आदेश मेरे लिए सबसे बढ़कर है. मैं न झूठे आश्वासन देता हूं और न झूठ बात बोलता हूं. बाकी किसी पद की बात तो मेरे दिमाग में आती ही नहीं है. राष्ट्रसेवा के लिए जहांं आगे कर दिया जाएगा, वहां खड़ा हो जाऊंगा.

लेकिन, आपने हाल ही में बयान दिया है कि खंडित जनादेश के हालात में आपके प्रधानमंत्री बनने की बात ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ जैसी है.

यह तो मैं अभी भी कह रहा हूं कि मेरे प्रधानमंत्री पद के दावेदार होने की बात ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसी ही है. लेकिन, अब अगर सपना सच हो जाए तो मैं इसमें क्या कर सकता हूं! वैसे भी जनता सपना दिखाने वाले नेताओं की पिटाई करती है, सपना देखने वाले नेताओं की नहीं.

आप कहते हैं कि मैं सीधी और स्पष्ट बात करता हूं, लेकिन आप के बयान हमेशा सुर्खी बनते हैं और कई बार भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उससे असहज हो जाता है. ऐसा क्यों?

मैं तो सीधी बात ही करता हूं. अब पार्टी में कई टेढ़े-मेढ़े लोग उससे परेशान हो जाते हैं तो मैं क्या कर सकता हूं?

टेढ़े-मेढ़े लोग! ऐसे कौन से लोग हैैं भाजपा मेें. आपका इशारा किसकी तरफ है?

देेेेखिए, मैं इतना नौसिखिया नेता तो हूं नहीं कि पार्टी के आंतरिक मामले को सार्वजनिक मंच पर बताऊं. भाजपा एक अनुशासित पार्टी है. मेरे बयानों से परेशान होने वाले टेढ़े हैं, पर मेरे हैैं.

राहुल गांधी और शरद पवार आपकी खूब तारीफ करते हैं. विपक्षी नेताओं में आप इतने लोकप्रिय क्यों हैं?

इसकी कोई खास वजह नहीं है. बात बस ये है कि सत्ता में रहते हुए भी मेरा व्यवहार ऐसा रहता है कि कल को मैं विपक्ष में आ जाऊं तो कोई परेशानी न हो.

प्रधानमंत्री मोदी अपनी रैलियों में नेहरू और इंदिरा गांधी पर तमाम आरोप लगाते हैं, लेकिन आप जब-तब इन दोनों की तारीफ करते रहते हैं. ऐसा क्यों?

ऐसा मैं इसलिए करता हूं ताकि प्रधानमंत्री जी के भाषणों में जनता की रुचि बनी रहे. अब ज्यादातर भाजपाई नेहरू की बुराई कर ही रहे हैं. तो मैं बीच-बीच में नेहरू की तारीफ कर देता हूं, वरना पब्लिक बोर हो जाएगी और कहेगी कि ये भाजपाई अपनी छोड़ किसी और की तारीफ कर ही नहीं सकते. नेहरू-इंदिरा की तारीफ का एक यह भी फायदा है कि लगे हाथ राहुल गांधी की तारीफ का एहसान भी उतर जाता है.

मोदी सरकार में बेहतर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों में आपका नाम सबसे ऊपर है. सड़क निर्माण में तेजी के लिए आपकी तारीफ होती है.

हां, जब मैं मंत्री बना था तो मुझे लगा था कि हम लोग विकास के नाम पर सत्ता में आए हैं, इसलिए मैंने कोशिश की कि जब हम चुनाव में जाएं तो जनता को अपने कुछ काम बता सकें. लेकिन मुझे क्या पता था कि हम इस चुनाव में भी हिंदू, मुसलमान, इंदिरा, नेहरू, सेना जैसे मुद्दे से काम चला लेंगे.

लेकिन, गंगा सफाई के मोर्चे पर कुछ ठोस काम क्यों नहीं हो पाया?

गंगा सफाई के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई थी. इसमें प्रधानमंत्री जी भी थे. लेकिन, जब भी कमेटी की बैठक होनी होती थी, मोदी जी को मां गंगा बुला लेती थीं. फिर बैठक नहीं हो पाती थी. इसलिए ज्यादा काम नहीं हो पाया. हां, कुंभ में योगी जी की पूरी कैबिनेट और बाद में खुद प्रधानमंत्री जी ने गंगा स्नान कर इस दिशा में कुछ काम किया है.

गडकरी जी, आप इस तरह से क्यों बोल देते हैं कि ‘नारेबाजी बंद करो नहीं तो थप्पड़ लगेंगे’, ‘सड़क ठीक नहीं बनी तो ठेकेदार पर बुलडोज़र चलवा दूंगा’ वगैरह,वगैरह.

भाई, मैं सीधी बात करता हूं. ऐसी बातें इसलिए बोल देता हूं कि कहीं लोग यह न समझ बैठें कि मैं आदमी भी बिल्कुल सीधा-साधा हूं. आप तो जानते ही हैं कि आजकल सीधे आदमी का कहीं गुजारा नहीं है. इसलिए, ऐसे बयान देने पड़ते हैं.

...बस-बस अब और कोई सवाल नहीं क्योंकि मुझे लग रहा है कि अब आप मेरी बात को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले हो.